महाराष्ट्र के ठाणे में एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे खतरनाक खेल को उजागर कर दिया. एक नामी अस्पताल के भीतर अवैध रूप से चल रहे IVF सेंटर पर छापेमारी की गई. इसके बाद उस केंद्र को बंद कर दिया गया. इस मामले से पूरे शहर में हड़कंप मच गया.
एजेंसी के अनुसार, मामला तब सामने आया, जब हाल ही में ठाणे के बदलापुर इलाके में अंडाणु (एग) बेचने के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ था. इसी के बाद प्रशासन सतर्क हुआ और स्वास्थ्य विभाग ने 6 मार्च को एक अस्पताल में छापा मारा. जांच में सामने आया कि वहां बिना अनुमति के IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर चलाया जा रहा था.
छापेमारी के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने सभी को चौंका दिया. सेंटर के पास जरूरी लाइसेंस और मंजूरी नहीं थी, फिर भी वहां इलाज के नाम पर संवेदनशील प्रक्रिया चल रही थी. अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लेते हुए इस अवैध IVF सेंटर की मान्यता रद्द कर दी और वहां मौजूद तीन सोनोग्राफी मशीनों को सील कर दिया.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस अवैध नेटवर्क के जरिए गरीब महिलाओं का शोषण किया जा रहा था. उन्हें पैसों का लालच देकर हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे, जिससे उनके शरीर में जरूरत से ज्यादा अंडाणु तैयार किए जा सकें. इसके बाद इन अंडाणुओं को निकालकर लाखों रुपये में उन कपल को बेचा जाता था, जो संतान पाने के लिए IVF का सहारा लेते हैं.
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इस खुलासे ने प्रशासन को झकझोर कर रख दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने तुरंत बैठक बुलाई. इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. मेयर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शहर के सभी IVF और सोनोग्राफी सेंटरों की जांच की जाए.
ठाणे की मेयर ने विशेष अभियान चलाने के दिए निर्देश
ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने अवैध सोनोग्राफी केंद्रों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का भी आदेश दिया. मेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. जांच की प्रगति पर हर हफ्ते रिपोर्ट पेश की जाएगी.
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अवैध सेंटर न सिर्फ कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि लोगों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ करते हैं. IVF जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं, लेकिन कुछ लोग लालच में इन नियमों को ताक पर रख देते हैं.
ऐसे में सवाल है कि क्या स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे ऐसे अवैध धंधों पर पहले से नजर नहीं थी? और अगर नहीं, तो अब कितने और ऐसे सेंटर सामने आ सकते हैं? फिलहाल प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए शहरभर में जांच अभियान शुरू कर दिया है.