केरल हाई कोर्ट ने नाबालिग से रेप और गंभीर यौन अपराध के मामले में सजा काट रहे एक दोषी की याचिका को खारिज कर दिया है. दरअसल, अपराधी की पत्नी का हाल ही में निधन हो गया. उसके परिवार ने हाई कोर्ट में पत्नी के निधन के बाद होने वाली 16वें दिन की धार्मिक रस्म के लिए 10 दिन की इमरजेंसी पैरोल मांगी थी. हालांकि केरल हाईकोर्ट ने उसकी इस याचिका को खारिज कर दिया है.
केरल हाई कोर्ट ने याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति को इस तरह की राहत देना समाज में गलत मैसेज देना होगा.
10 दिन के पैरोल की मांग की थी
हाई कोर्ट में दोषी की बहन ने याचिका दाखिल कर 10 दिन की इमरजेंसी पैरोल की मांग की थी. दायर याचिका में परिवार की ओर से कहा गया कि अपराधी की पत्नी का निधन हो गया है. परिवार में 16वें दिन की धार्मिक रस्म होनी है, इसलिए उसे कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आने की इजाजत दी जाए.
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा अपराधी बेहद गंभीर और जघन्य अपराध के मामले में सजा काट रहा है. उस पर नाबालिग लड़की से रेप, उसके साथ गंभीर यौन उत्पीड़न और लूट जैसे अपराध साबित हो चुके हैं. इन मामलों में अदालत को बहुत ही ज्यादा सावधानी से फैसला लेना होता है.
कोर्ट ने ये भी कहा कि दोषी को इससे पहले ही उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी जा चुकी है. कोर्ट की ओर से यह उसके प्रति दिखाई गई अधिकतम मानवीय सहानुभूति थी.
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कोर्ट ने कहा-इससे समाज में गलत संदेश जाएगा
केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित सक्षम अधिकारी ने पहले ही दोषी की इमरजेंसी पैरोल की मांग पर किया था, लेकिन पर्याप्त कारण न मिलने की वजह से उसे खारिज कर दिया गया था. अदालत ने यह भी माना कि अधिकारी का फैसला सही था और उसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है.
अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई ऐसा खास या असाधारण वजह सामने नहीं आई, जिसके आधार पर आपातकालीन पैरोल की याचिका को मंजूरी दी जाए. कोर्ट का कहना है कि अगर इतने गंभीर अपराध में दोषी ठहराए गए अपराधी को इस तरह की राहत दी जाएगी तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा. साथ ही कानून के उद्देश्य पर भी असर पड़ेगा.