अजीत अगरकर की कुर्सी पर फैसला अभी हुआ नहीं है, लेकिन भारतीय क्रिकेट में चर्चा शुरू हो चुकी है. अगरकर का कार्यकाल आगे बढ़ता है या नहीं, यह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को तय करना है. पार्थिव पटेल और प्रज्ञान ओझा जैसे नाम नए चीफ सेलेक्टर के संभावित विकल्पों में चर्चा में हैं. लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि अगरकर रहेंगे या जाएंगे. असली सवाल यह है कि अगर उनकी जगह नया चेहरा आया तो गिल की टीम की टीम पर उसका कितना असर पड़ेगा.
असली सवाल है- अगरकर की कुर्सी गई तो शुभमन गिल की टीम का क्या होगा?
क्योंकि 2027 वनडे वर्ल्ड कप अब दूर की मंजिल नहीं है. कुछ ही महीने बचे हैं... गिल की कप्तानी वाली वनडे टीम का खाका इसी दौरान तैयार होना है. ऐसे में चयन समिति के मुखिया का बदलना सिर्फ नाम बदलना नहीं होगा. इसके साथ टीम को देखने का नजरिया भी बदल सकता है. यहीं से मामला दिलचस्प हो जाता है.
अगर नया चीफ सेलेक्टर आता है तो वह अगरकर के बनाए फैसलों को उसी नजर से देखेगा, यह जरूरी नहीं. उसकी अपनी क्रिकेटिंग सोच होगी. सीनियर खिलाड़ियों को लेकर उसका नजरिया अलग हो सकता है. युवाओं को लेकर उसका धैर्य अलग हो सकता है... और सबसे अहम, 2027 वर्ल्ड कप के लिए टीम बनाने की उसकी प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं.
गिल की टीम अभी बनी कहां है?
गिल को कप्तानी की जिम्मेदारी मिल चुकी है, लेकिन उनकी वनडे टीम का अंतिम चेहरा अभी तय नहीं है. यही वजह है कि चीफ सेलेक्टर में बदलाव का असर सीधे कप्तान की टीम पर पड़ सकता है.
सबसे पहले बल्लेबाजी...
क्या भारत उसी ढांचे के साथ आगे बढ़ेगा, जिसके साथ 2023 वनडे वर्ल्ड कप खेला गया था? या गिल की कप्तानी में नई बल्लेबाजी लाइन-अप तैयार होगी? रोहित शर्मा और विराट कोहली के दौर से आगे निकलते हुए भारत को अब वनडे की अगली पीढ़ी का ढांचा तय करना है- कौन इस टीम की रीढ़ होगा और किन चेहरों के इर्द-गिर्द 2027 की टीम खड़ी होगी.
यशस्वी जायसवाल भी इस नए वनडे खाके की बड़ी पहेली हैं. टेस्ट में जगह बना चुके जायसवाल को वनडे में लगातार मौके नहीं मिले, टी20 में भी तस्वीर साफ नहीं है. अब अगर 2027 की टीम में उन्हें शामिल करना है तो सवाल सिर्फ जगह का नहीं, पूरे बल्लेबाजी क्रम के गणित का है- ओपनिंग में आएंगे या मध्यक्रम में?
फिर आता है हार्दिक पंड्या वाला सवाल...
भारत को 2027 में ऐसा ऑलराउंडर चाहिए जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में भरोसा दे सके. हार्दिक पंड्या की फिटनेस और उनकी उपलब्धता को लेकर पिछले कुछ वर्षों में चयनकर्ताओं को लगातार फैसले लेने पड़े हैं. नया चीफ सेलेक्टर इस सवाल को किस नजर से देखेगा, यह भी अहम होगा.
स्पिन में भी खाली जगह है
कुलदीप यादव एक विकल्प हैं, लेकिन उनके साथ कौन?
रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल में से किसे चुनना है, यह सिर्फ दो नामों का फैसला नहीं है. दोनों की भूमिका अलग है. भारत के सामने सवाल है कि वह जडेजा के अनुभव के साथ आगे बढ़ेगा या 2027 वर्ल्ड कप को देखते हुए अक्षर के साथ नई जोड़ी तैयार करेगा.
... और अगर नया चीफ सेलेक्टर आया तो संभव है कि वह इस सवाल को अगरकर से अलग तरीके से देखे.
तेज गेंदबाजी में भी यही कहानी है. जसप्रीत बुमराह के आसपास भारत का पेस अटैक कैसा होगा? कौन दूसरा भरोसेमंद नाम होगा? कौन तीसरा विकल्प? दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में सिर्फ गति नहीं, गेंदबाजी का संयोजन भी मायने रखेगा.
यानी नए चीफ सेलेक्टर के सामने आते ही सवालों की सूची तैयार हैं...
कप्तान गिल की टीम में कौन रहेगा? कौन बाहर जाएगा? किस युवा को मौका मिलेगा? किस सीनियर को कितना समय मिलेगा? और 2027 के लिए टीम कब से बननी शुरू होगी?
इसलिए मामला सिर्फ अगरकर का नहीं है. अगरकर को आगे बढ़ाया जाता है तो कम से कम चयन की मौजूदा दिशा में निरंतरता रहेगी. अगर नया चेहरा आता है तो उसके पास अपनी सोच के मुताबिक बदलाव करने का अधिकार भी होगा.
दोनों रास्तों के अपने तर्क हैं. लेकिन टाइमिंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
भारत को अब ऐसी चयन समिति चाहिए जो सिर्फ अगली सीरीज नहीं, अगले वर्ल्ड कप को देखकर फैसले करे. क्योंकि वनडे टीम तैयार करने के लिए भारत के पास अनंत मौके नहीं हैं.
और सबसे बड़ी बात- गिल की कप्तानी अभी बन रही है. ऐसे में कप्तान और चयन समिति की सोच का एक जैसा होना बेहद जरूरी होगा.
इसलिए अगरकर के भविष्य पर फैसला करते समय सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कौन ज्यादा बड़ा नाम है. सवाल यह होना चाहिए- क्या नया चीफ सेलेक्टर आते ही गिल की टीम की दिशा बदल देगा? क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो बदलाव सिर्फ चयन समिति में नहीं होगा. 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी का पूरा रास्ता बदल सकता है.