नेपाल में 26 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों को तबाह कर दिया था. घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल तक बाढ़ के तेज बहाव में बह गए. इस तबाही के बाद कई लोग अब भी लापता हैं और उनके परिवार किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे हैं. अब इन लापता लोगों की पहचान के लिए DNA जांच का सहारा लिया जा रहा है.
काठमांडू में तैनात भारतीय फॉरेंसिक टीम 3,000 DNA सैंपल पर काम कर रही है और अब तक 1,200 से ज्यादा DNA प्रोफाइल तैयार कर चुकी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को अपनी बाई-वीकली प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नेपाल में भारतीय टीम कई लैबोरेटरी में अपने नेपाली सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रही है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय फॉरेंसिक टीम को करीब 3,000 DNA सैंपल की जांच करनी है. इनमें से अब तक 1,200 से ज्यादा DNA प्रोफाइल तैयार किए जा चुके हैं. जायसवाल ने बताया कि पहले भारत ने नेपाल में 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी.
अब लापता लोगों के परिवारों को नेपाल अधिकारियों से अपनों की जानकारी मिलने का इंतजार है. फिलहाल DNA प्रोफाइल की मदद से सैंपल का मिलान कर लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई थी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई थी. इसके बाद उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान देखने को मिला. हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से नीचे की तरफ आया था. इसके तेज बहाव में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी क्षतिग्रस्त हुए, और हजारों लोग मारे गए.
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अब इस आपदा के 29 दिन बाद सबसे बड़ी चुनौती है लापता लोगों का पता लगाना और उनकी पहचान करना. ऐसे में काठमांडू में चल रही DNA जांच उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की रोशनी है, जो अब तक अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं.
भारतीय फॉरेंसिक टीम की जांच अभी जारी है. अब नजर इस बात पर है कि DNA प्रोफाइल के मिलान से कितने लापता लोगों की पहचान हो पाती है और नेपाल के अधिकारी भारतीय नागरिकों के बारे में आगे क्या जानकारी साझा करते हैं.