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भाजपा के ‘बयानबहादुरों’ पर भारी मोदी सरकार का 2.0 वर्जन!

चुनावी जीत के बाद जब मोदी ने संसद के सेंट्रल हॉल में सांसदों को संबोधित किया तो उन्होंने सबका साथ-सबका विकास के साथ सबका विश्वास जोड़ा. और कहा कि अल्पसंख्यकों को अभी तक डराया गया है, हमें उनका विश्वास जीतने की जरूरत है.

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Prime Minister Narendra Modi (File Photo)
Prime Minister Narendra Modi (File Photo)

प्रचंड जीत हासिल कर एक बार फिर सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार लीक से हटकर चल रहे हैं. पीएम मोदी ने अपने पिछले नारे ‘सबका साथ-सबका विकास’ में ‘सबका विश्वास’ जोड़ा है. और सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होते ही इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है. फिर चाहे वो अनंत हेगड़े-मेनका गांधी की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो, या फिर इफ्तार वाले ट्वीट पर गिरिराज सिंह को दी गई अंतिम चेतावनी. सरकार और पार्टी की पूरी कोशिश है कि इस बार ‘सबका विश्वास’ पर जोर दिया जाए.

पिछले कार्यकाल में भी बयानों की वजह से चर्चा में रहने वाले गिरिराज सिंह ने मंगलवार को जब इफ्तार को लेकर ट्वीट किया तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके साथियों ने इस पर ऐतराज जताया. शाम होते-होते ये भी खबर आ गई कि पार्टी अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री अमित शाह एक्शन में आ गए हैं और गिरिराज सिंह को अंतिम चेतावनी दे दी गई है.

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साफ संदेश है कि पिछले कार्यकाल में कई बार जो बेवजह विवादों का सामना मोदी सरकार को करना पड़ा, उससे वह इस बार सतर्कता बरत रही है.

प्रधानमंत्री के बयान से मिला संदेश...

चुनावी जीत के बाद जब मोदी ने संसद के सेंट्रल हॉल में सांसदों को संबोधित किया तो उन्होंने सबका साथ-सबका विकास के साथ सबका विश्वास जोड़ा. और कहा कि अल्पसंख्यकों को अभी तक डराया गया है, हमें उनका विश्वास जीतने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने पार्टी के उन बड़बोले नेताओं को भी संदेश दिया जो हमेशा सिर्फ बयानों की वजह से ही सुर्खियों में रहे.

प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘हमारे ही कुछ नेता ऐसे हैं जो मीडिया को मसाला देते हैं और सुबह उठते ही राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं. इससे सरकार के काम पर चर्चा कम और उनके बयानों पर चर्चा ज्यादा होती है. ऐसी बयानबाजी से हमें बचना चाहिए’. प्रधानमंत्री के इस संदेश को गिरिराज सिंह, साध्वी प्रज्ञा, साक्षी महाराज जैसे नेताओं के लिए चेतावनी माना गया.

संदेश के बाद दिखा एक्शन...

पीएम ने बयान दिया तो एक्शन भी शुरू हो गया. महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वालीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को पीएम मोदी ने मन से माफ करने से इनकार कर दिया तो संसद भवन में उनकी दुआ-सलाम भी नहीं कुबूली.

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इसके अलावा पिछले कार्यकाल में संविधान बदलने की बात करने वाले और ट्वीट के जरिए साध्वी प्रज्ञा का समर्थन करने वाले अनंत हेगड़े की मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई. वहीं चुनाव प्रचार के दौरान वोटों के हिसाब से काम का फॉर्मूला देने वालीं मेनका गांधी को भी इस बार मंत्री नहीं बनाया गया है, हालांकि उनके स्पीकर बनाए जाने की चर्चा अभी जोरों पर हैं.

इतना ही नहीं दिल्ली से सटे नोएडा से आने वाले महेश शर्मा की भी इस बार मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई है, उन्होंने पिछले कार्यकाल में मुस्लिमों और पहनावे को लेकर कई ऐसे बयान दिए थे, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई थीं.

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