'आप' को झाडू कैसे मिला? आम लोगों को ये बात अब तक शायद ही पता हो. कुछ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने ये जानने की कोशिश भी की थी, मगर नाकाम रहे.
असल में मायावती के ही 'एनओसी' पर केजरीवाल को झाडू चुनाव चिह्न मिल पाया था. अरसा पहले कांशीराम ने बहुजन समाज से जुड़े तमाम प्रतीकों को बुक करा लिया था. ऐसे में उनकी मर्जी के बगैर किसी भी ऐसी पार्टी को वे चुनाव चिह्न अलॉट नहीं हो सकते जिनका वास्ता बहुजन समाज से रहा हो.
झाडू की रिक्वेस्ट के साथ कि चूंकि आम आदमी का दायरा बहुजन समाज से ज्यादा है इसलिए उन्हें इसे अलॉट करने से . ये वो दौर रहा जब देश में केजरीवाल की देश में तूती बोलती थी - और उसी के बूते उन्होंने चुनाव आयोग को भी अपने प्रभाव में ले लिया.
खैर, चुनाव आयोग इस बात पर राजी हुआ कि कांशीराम की ओर से कोई अगर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दे दे, तो उन्हें सिंबल रिलीज किया जा सकता है. काफी अनुनय विनय के बाद मायावती एनओसी देने को राजी हुईं और केजरीवाल को सिंबल मिल पाया.
अब मायावती का इरादा बदल गया है. मायावती चाहती हैं कि झाडू केजरीवाल से वापस लेकर चुनाव आयोग उन्हें पार्टी सिंबल के तौर पर दे दे.
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