पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस टूट की ओर है. ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी के विधायकों ने बगावत कर बंगाल विधानसभा में अपना नेता प्रतिपक्ष बना लिया था. अब लोकसभा में भी पार्टी कुछ इसी ओर बढ़ रही है. काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में लोकसभा सांसदों के बागी गुट ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है.
टीएमसी बागी गुट की ओर से अलग गुट की मान्यता के लिए स्पीकर को लिखे गए पत्र पर 18 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. बागी गुट की ओर से यह पत्र 18 मई को ही लिखा जा चुका था. इस पत्र पर सांसदों के बागी गुट की अगुवा काकोली घोष दस्तीदार के साथ ही 17 अन्य सांसदों के हस्ताक्षर हैं. एक सांसद ने बाद में बागी गुट के समर्थन करते हुए अलग से स्पीकर को पत्र लिखा है.
स्पीकर को जब यह पत्र लिखा गया था, तब काकोली घोष टीएमसी की चीफ व्हिप थीं. टीएमसी ने 20 मई को लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी थी कि काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर उनकी जगह कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बनाया जा रहा है. काकोली गुट की ओर से अलग गुट की मान्यता के लिए पत्र 18 मई को ही दे दिया गया था.
टीएमसी का चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के पहले ही काकोली घोष ने स्पीकर को पत्र लिखकर दावा किया था कि उनके पास टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों का समर्थन है. काकोली गुट की ओर से कहा गया था कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनके साथ पार्टी के कुल 28 में से 20 सांसद हैं. यह आंकड़ा दो तिहाई से अधिक है. ऐसे में उनको अलग गुट मानते हुए विपक्षी बेंच से अलग बैठाने की व्यवस्था की जाए.