सयानी घोष (Saayoni Ghosh) एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने मनोरंजन और राजनीति दोनों ही क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है. 24 फरवरी 2021 को वह All India Trinamool Congress (टीएमसी) में शामिल हुई. उसी साल उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आसनसोल दक्षिण सीट से उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन वह यह चुनाव जीत नहीं पाईं. जून 2021 में उन्हें टीएमसी के युवा विंग का अध्यक्ष बना दिया गया, जो उनकी बढ़ती राजनीतिक अहमियत को दिखाता है.
2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें एक भर्ती घोटाले के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया, जिसमें उनसे करीब 11 घंटे तक सवाल-जवाब हुए. 2024 के लोकसभा चुनाव में सयानी घोष ने जादवपुर सीट से चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की. उन्होंने करीब 2.5 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
2026 के चुनावों में उनकी सक्रियता और उपस्थिति ने उन्हें एक चर्चित चेहरा बना दिया.
उनका जन्म 27 जनवरी 1993 को हुआ और उन्होंने शुरुआत में बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में बतौर अभिनेत्री काम किया.
सिर्फ अभिनय ही नहीं, सायोनी ने एंकरिंग में भी हाथ आजमाया. उन्होंने 2013 और 2014 में कलकत्ता फुटबॉल लीग के लाइव टेलीकास्ट को होस्ट किया, जिससे उनकी पॉपुलैरिटी और बढ़ी.
सयानी घोष मंगलवार को बरुईपुर में रेप पीड़िता के परिवार से मिलने गई थीं. तभी उन्हें स्थानीय लोगों ने घेर लिया. जनता सयानी से सवाल पूछने लगी और 'गद्दार', 'बेईमान' कहकर चिल्लाने लगी. हालात बिगड़ता देख सयानी को तुरंत वहां से निकलना पड़ा.
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में सपा विधायक आरके वर्मा के खिलाफ फेसबुक पर महिला सांसद और प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है. भाजयुमो जिलाध्यक्ष की शिकायत पर पुलिस ने यह कार्रवाई शुरू की है.
तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी संकट के बीच सांसद सयानी घोष, माला रॉय समेत कई बागी सांसद दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर जुटे. सोमवार को ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग कर सकते हैं. बागी गुट का दावा है कि उसे 28 में से 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है. वहीं महुआ मोइत्रा ने सुदीप बंद्योपाध्याय की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
टीएमसी के बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को 18 मई की तारीख में ही अलग गुट के रूप में मान्यता के लिए पत्र लिख दिया था. 18 मई के दिन स्पीकर को दिए गए इस पत्र पर 18 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. एक
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सयानी घोष के नाम की चर्चा हो रही है. सयानी ने टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी का दामन छोड़कर बगावती रुख अपनाया है. पर क्या आप जानते हैं कि राजनीति में बगावती होने से पहले वो ग्लैमर वर्ल्ड का हिस्सा थीं.
TMC में बगावत की कहानी लिखने वाले सांसदों में 10 ऐसे हैं जो पहली बार लोकसभा सांसद बने हैं. इनमें डॉक्टर, एक्टर और क्रिकेटर शामिल हैं. TMC के हारते ही इन नेताओं ने राज्य की राजनीतिक हवा का रुख पहचान लिया है.
पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलते ही टीएमसी पूरी तरह बिखर गई है. ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष और युसुफ पठान को सियासत के पिच पर खड़ा किया, लेकिन अब बागी खेमे के साथ खड़े हैं. टीएमसी के बागी सांसदों में इन तीनों ही नेताओं के नाम है, लेकिन उसके बाद भी खामोश हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है. एक-एक कर टीएमसी के विधायक और सांसद सियासी पाला बदलते जा रहे हैं. ममता बनर्जी के तमाम मजबूत सिपहसलार और बड़े सितारी भी बगावत की राह पर चल पड़े हैं.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. इस बैठक में सयानी घोष भी मौजूद रहीं. बागी सांसदों के साथ यह मीटिंग करीब एक घंटे तक चली.
ममता बनर्जी को अपना सियासी आदर्श बताने वाली सयानी घोष भी बगावत की राह पर चल पड़ी हैं. टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों के साथ है, जिन्होंने संसद में अलग बैठने का फैसला किया है. 28 साल की उम्र में सियासत में कदम रखने वाली सयानी घोष की कहानी क्या है?
पश्चिम बंगाल चुनाव हारने के बाद से एक के बाद एक झटके ममता बनर्जी को लगते जा रहे हैं. टीएमसी के 20 बागी सांसदों में सयानी घोष भी शामिल हैं, जिन्होंने स्पीकर को पत्र लिखकर अलग बैठने और एनडीए को समर्थन करने का ऐलान किया है. ये ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां तृणमूल कांग्रेस के अंदर बगावत खुलकर सामने आ गई है. करीब बीस सांसदों ने अलग समूह बनाने का फैसला लिया है. सयानी घोष का नाम भी सामने आने से ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी को चिढ़ाते हुए सयानी ने गाया था- वादा करो नहीं छोड़ेगे तुम मेरा साथ... लगभग 50 दिन हुए हैं, ये गाना सयानी के सामने सवाल बनकर खड़ा हो गया है. सयानी से इस बार ये सवाल TMC के नेता-कार्यकर्ता पूछ रहे हैं.
TCM MP Sayani Ghosh Networth: टीएमसी की फायरब्रांड नेता लोकसभा सांसद सयानी घोष ने भी ममता बनर्जी को झटका दे दिया है और बागियों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं. सयानी 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर से लोकसभा चुनाव जीत सांसद बनीं.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि हमने एक असमान पिच पर अकल्पनीय मुश्किलों के बावजूद, पूरी हिम्मत से लड़ाई लड़ी. उन्होंने कहा कि सेकुलर इंडिया के लिए टीएमसी का संघर्ष जारी रहेगा. वहीं सयानी घोष ने कहा कि वे बिना किसी डर के अपनी नेता के साथ हैं.
बंगाल बीजेपी की ओर से जारी संपत्तियों के इस लिस्ट से बंगाल की राजनीति में उफान आ गया है. इसमें अभिषेक बनर्जी की कई लोगों के साथ साझा जायदाद का खुलासा हुआ है. इनमें से एक संपत्ति श्रीमती सयानी घोष नाम की महिला के साथ है. इस पर TMC सांसद ने अपना पक्ष रखा है.
टीएमसी सांसद सयानी घोष ने कहा है कि सत्य की हमेशा विजय होती है और कोलकाता नगर निगम अधिकारियों की जांच में ये सच्चाई सामने आ गई है. उन्होंने कहा कि ये दो सांसदों की छवि को खराब करने का स्पष्ट मामला है.
पुरुलिया की रैली में सायोनी घोष ने अमित शाह पर तंज कसते हुए 4 मई को हरा अबीर खेलने की बात कही और TMC की जीत का भरोसा जताया. चुनावी मंच से शायरी और गीतों के जरिए माहौल बनाते हुए उन्होंने साफ संकेत दिया कि इस बार बंगाल में सत्ता बरकरार रहने वाली है.
सयानी घोष टीएमसी का सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं बल्कि वे बंगाली अस्मिता की सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में सामने आईं है. उनके संबोधनों में 'बांग्लार मेये', 'बांग्लार गर्बो' जैसे शब्द बार-बार सुनाई देते हैं. सयानी की कहानी छोटे स्क्रीन से शुरू हुई है. उन्होंने फिल्मों से पहचान बनाई और अब वे बंगाल के राजनीतिक मानचित्र पर उभर रही हैं.