एनसीपी (SP) चीफ एक बार फिर ऐसा कदम उठाने जा रहे हैं कि INDIA गठबंधन की सांसें अटकने लगी हैं. खबर है कि पुणे के पवार ट्रस्ट के कार्यक्रम में पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी है. बारामती में स्थित शिक्षण संस्थान 'विद्या प्रतिष्ठान' के ट्रस्टियों ने NCP (SP) प्रमुख शरद पवार से आग्रह किया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करें.
प्रेरणा स्थल का उद्घाटन करने जा सकते हैं पीएम मोदी
ट्रस्ट 'प्रेरणा स्थल' नाम के नए बने गुंबद का उद्घाटन पीएम मोदी से कराना चाहता है. संस्थान के प्रमुख पवार ने ट्रस्टियों को भरोसा दिलाया है कि वे प्रधानमंत्री से मिलने का समय लेंगे ताकि उनकी भावनाएं उन तक पहुंचा सकें और उन्हें निमंत्रण दे सकें. इससे पहले दिन में शरद पवार ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के विरोधी गुटों के संभावित विलय की अटकलों को भी खारिज कर दिया था.
असल में विपक्षी 'एकता' जब-जब एकजुट हो सत्ता पक्ष के खिलाफ जमा-जुटान कर रही होती है, ठीक उसी वक्त NCP (SP) लीडर शरद पवार ऐसा कदम उठा लेते हैं कि विपक्षी दलों की सांसें ऊपर-नीचे होने लगती हैं. शरद पवार की राजनीति का तरीका शुरू से ही ऐसा रहा है कि उनके अगले कदम का अंदाजा लगा पाना हमेशा मुश्किल रहा है. इसकी वजह से INDIA गठबंधन हमेशा एक खास तरह की दुविधा में फंसा दिखाई देता है.
क्या शरद पवार का ये नया दांव?
यह पहली बार नहीं है, जब शरद पवार ने ऐसा दांव चला हो, बल्कि इससे पहले उनके और उनके परिवार के सदस्यों ने जिस तरह से सत्ता पक्ष के नेताओं के प्रति अपनी दिलचस्पी और नजदीकियां दिखाई हैं उससे 'विपक्षी एकता' की विचारधारा को बार-बार झटका लगा है.

बीते 22 जुलाई की ही बात करें तो शरद पवार ने इस दिन नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की थी. इस बैठक में उनकी बेटी और बारामती से लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं. यह घटनाक्रम तब हुआ जब ट्रस्टी 'प्रेरणा स्थल' के उद्घाटन के लिए अनुरोध कर रहे थे, जबकि पवार ने NCP के फिर से एक होने की खबरों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया. लेकिन संसद के मॉनसून सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP (शरद पवार) के प्रमुख शरद पवार की इस मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया था.
पहले छात्रों से मिले फिर पीएम मोदी से और बढ़ गईं सियासी हलचल
खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले शरद पवार जंतर-मंतर पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्र नेता अभिजीत दिपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रोटेस्ट को समर्थन दिया था.
इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों के बीच संभावित मतभेदों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया था. इस दौरान एक ओर कांग्रेस, सपा और शिवसेना (UBT) जैसे दल छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक हो रखे थे तो ऐसे में शरद पवार की प्रधानमंत्री से हुई अचानक मुलाकात ने विपक्ष की रणनीति को ही 'कमजोर' साबित कर दिया था.
डिलिमिटेशन पर क्या रहेगा रुख?
इस मुलाकात के बाद यह भी चर्चा चल पड़ी थी कि एनसीपी (एसपी) मॉनसून सेशन में प्रस्तावित डिलिमिटेशन बिल को लेकर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन कर सकती है. ये अटकलें सही होती तो विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर के मतभेद और अधिक साफ हो जाते, हालांकि खुद सरकार ने डिलिमिटेशन पर अपना रुख अभी स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन अगर मॉनसून सेशन में डिलिमिटेशन पर बात होती है तो भी शरद पवार का अगला कदम क्या होगा, इसका साफ-साफ पता लगा पाना अभी तय नहीं है.
शरद पवार के इस व्यवहार के तीन कारण
आजतक में विशेष संवाददाता ऋत्विक भालेकर शरद पवार की इस रणनीति के पीछे कुछ खास कारण गिनाते हैं. पहला, वह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के साथ संवाद बनाए रखकर अपनी राजनीतिक सौदेबाजी की क्षमता को मजबूत रखना चाहते हैं. इससे उन्हें INDIA गठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दोनों के साथ बातचीत की गुंजाइश मिलती है.
दूसरा, महाराष्ट्र के राजनीतिक और संसदीय हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर व्यावहारिक रुख अपनाना उनकी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. माना जा रहा है कि परिसीमन जैसे मुद्दे पर नरम रुख अपनाकर वह राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास कर सकते हैं.
तीसरा, शरद पवार लंबे समय से ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी स्वीकार्यता सत्ता और विपक्ष दोनों में रही है. यही वजह है कि वे खुद को ऐसे वरिष्ठ राजनेता के रूप में स्थापित रखना चाहते हैं, जो राजनीतिक गतिरोध की स्थिति में दोनों पक्षों के बीच संवाद का सेतु बन सके.
क्या शरद पवार की ही राह पर सुप्रिया सुले?
ये तो रही शरद पवार की बात, लेकिन हाल की घटनाएं बताती हैं कि सुप्रिया सुले भी NCP (SP) प्रमुख के ही नक्शे कदम पर हैं. बीती 17 जुलाई को सुप्रिया सुले दिल्ली में थीं. वह रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई सर्वदलीय मीटिंग में शामिल हुईं. इसी मीटिंग से पहले वह राजनाथ सिंह के पैर छूती भी दिखीं.
इतना ही नहीं, इसके बाद वह बिजनेस अडवाइजरी कमेटी (BAC) की एक मीटिंग में भी शामिल हुईं. 20 जुलाई को संसद सत्र की शुरुआत वाले दिन भी सुप्रिया सुले दिल्ली में रहीं और तब वह विपक्षी दलों की मीटिंग में शामिल हुईं. इस मीटिंग में राहुल गांधी , मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए.
ये सारे घटनाक्रम लगातार तब हो रहे हैं जब इस बात की चर्चा बहुत तेज है कि शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी का धड़ा NDA के साथ जाने की तैयारी में है. चर्चा ये भी है कि बीजेपी ने पहले दोनों धड़ों को आपस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. बीते कुछ दिनों में एनसीपी के दोनों धड़ों के कई नेता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात भी कर चुके हैं. कहा जा रहा है कि अपनी पार्टी में एक और टूट से बचाने के लिए शरद पवार और सुप्रिया सुले ऐसा दांव खेल रहे हैं जिससे कोई समझ नहीं पा रहा है.
तो कुल मिलाकर, टूट-विलय की तमाम चर्चाएं और सत्ता व विपक्ष दोनों के साथ प्रासंगिक बने रहने की कवायद से पवार परिवार ने महाराष्ट्र के साथ-साथ दिल्ली की पॉलिटिक्स में भी हलचल मचा रखी है. इन सबके बीच ट्रस्ट की ओर से पीएम मोदी को न्योता देने वाली खबर से सनसनी और बढ़ गई है, लेकिन अभी तक किसी को अंदाजा नहीं है कि आखिर शरद पवार क्या दांव खेल रहे हैं.