असम एक बार फिर भीषण बाढ़ की चपेट में है. इस साल आई बाढ़ में अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5.24 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. राज्य के पांच जिले बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जिनमें चराइदेव सबसे अधिक प्रभावित जिला है. हजारों विस्थापित लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.
हर साल असम में बाढ़ क्यों आती है? इसका जवाब राज्य की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और दुनिया की सबसे विशाल नदियों में से एक ब्रह्मपुत्र से जुड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन तीनों कारकों का अनोखा मेल असम में हर साल बाढ़ लाता है.
हिमालय से निकलती है ब्रह्मपुत्र
असम की बाढ़ की कहानी का केंद्र ब्रह्मपुत्र नदी है. यह नदी तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो (Yarlung Tsangpo) के नाम से निकलती है. तिब्बत में पूर्व की ओर बहने के बाद यह नामचा बरवा पर्वत के पास हिमालय के चारों ओर तीखा मोड़ लेती है और अरुणाचल प्रदेश में सियांग के नाम से प्रवेश करती है.
The relief ops by @IAF_MCC and our District Administrations continue in full swing in flood affected areas.
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 26, 2026
As there are some dry patches now available due to water receding in some areas, the airdrops are now more targeted & benefitting larger number of people.#AssamFloods pic.twitter.com/6n6Ml2aGAC
अरुणाचल की पहाड़ी नदियों का पानी अपने साथ मिलाने के बाद यह असम में प्रवेश करते ही ब्रह्मपुत्र कहलाती है. तब तक इसमें हिमालय के ग्लेशियरों, बर्फ के पिघलने और भारी बारिश का विशाल जल पहले ही शामिल हो चुका होता है, जिससे इसका जलस्तर और प्रवाह कई गुना बढ़ जाता है.
पहाड़ों से घिरी घाटी में है असम
असम एक संकरी घाटी में स्थित है, जिसके उत्तर में पूर्वी हिमालय, पूर्व और दक्षिण-पूर्व में पटकाई और नागा पहाड़ियां और दक्षिण में मेघालय का पठार है.
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं. ऊंचाई पर पहुंचकर हवा ठंडी होती है और भारी वर्षा होती है. इस प्रक्रिया को ओरोग्राफिक रेनफॉल (Orographic Rainfall) कहा जाता है. इस बारिश का पानी तेजी से सैकड़ों सहायक नदियों- जैसे सुबनसिरी, मानस, जिया भराली, धानसिरी और कोपिली के जरिए ब्रह्मपुत्र में पहुंचता है. इससे मॉनसून के दौरान नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ जाता है.
The floods in Assam is worsening. Lakhs of people have been displaced and hundreds of bodies of humans and animals are flowing with the flood water.
— Sayantika (@SayantikaSays) July 26, 2026
Pray for Assam 💔🙏🏻 pic.twitter.com/XTqM208Z1w
ऐसी नदी जो अपने साथ पहाड़ बहाकर लाती है
ब्रह्मपुत्र भारत की अन्य नदियों से अलग है, क्योंकि यह दुनिया में सबसे अधिक गाद (Sediment) ढोने वाली नदियों में शामिल है. हिमालय एक युवा पर्वतमाला है, जहां लगातार कटाव और भूस्खलन होता रहता है. चट्टानें, रेत और मिट्टी बहकर ब्रह्मपुत्र में पहुंच जाती हैं. जब यह गाद असम के मैदानी इलाकों में जमा होती है तो नदी का तल धीरे-धीरे ऊंचा हो जाता है. इससे नदी की जल वहन क्षमता घट जाती है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.
ब्रह्मपुत्र एक ब्रेडेड रिवर (Braided River) भी है, यानी इसकी कई धाराएं लगातार अपना रास्ता बदलती रहती हैं और बीच में रेत के टापू (चार) बनते रहते हैं. यही वजह है कि तटबंधों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है और तेज बहाव के दौरान उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है.
असम में बाढ़ सिर्फ स्थानीय बारिश की वजह से नहीं आती. मॉनसून के दौरान तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश, भूटान और पूरे पूर्वोत्तर भारत में एक साथ भारी बारिश होती है. इन सभी क्षेत्रों का पानी अलग-अलग सहायक नदियों के जरिए ब्रह्मपुत्र में पहुंचता है. जब कई नदियों में आई बाढ़ का पानी एक साथ ब्रह्मपुत्र में मिलता है तो नदी अपने किनारे तोड़कर बड़े इलाके में फैल जाती है.
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण पूर्वी हिमालय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं. कम समय में होने वाली मूसलाधार बारिश, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और मॉनसून के दौरान अधिक तीव्र वर्षा नदियों में अचानक जलप्रवाह बढ़ा रही है. इसके अलावा तेजी से बढ़ते शहरीकरण, वेटलैंड्स पर अतिक्रमण, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वनों की कटाई और नेचुरल फ्लड प्लेन पर निर्माण ने भी अतिरिक्त पानी को जमीन में समाने की क्षमता कम कर दी है. इससे बाढ़ का प्रभाव और अधिक विनाशकारी हो गया है.
Flood havoc in Sivsagar district of Assam. Water can be seen flowing over rooftops of many houses.#AssamFloods pic.twitter.com/saAHj4R5Uy
— Oxomiya Jiyori 🇮🇳 (@SouleFacts) July 23, 2026
असम में बाढ़ रोकी जा सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि असम में बाढ़ को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है क्योंकि यह ब्रह्मपुत्र नदी के प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है. दरअसल, हर साल आने वाली बाढ़ उपजाऊ मिट्टी लाती है, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसी वेटलैंड को जीवित रखती है और कृषि, मत्स्य पालन के लिए भी फायदेमंद होती है. हालांकि, इसके विनाशकारी असर को कम किया जा सकता है. इसके लिए बेहतर फ्लड फोरकास्ट सिस्टम, प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करने वाली वेटलैंड्स का संरक्षण, जरूरत के मुताबिक मजबूत तटबंध, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निर्माण से बचने जैसे कदम जरूरी हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, असम की बाढ़ केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह उसकी भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाली ब्रह्मपुत्र नदी की प्रकृति का परिणाम है. दुनिया की सबसे शक्तिशाली नदियों में से एक, अत्यधिक वर्षा वाले पहाड़ों और ताकतवर मॉनसून सिस्टम के संगम पर स्थित होने के कारण असम में हर साल बाढ़ आना लगभग जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है.