आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री करुमुरि वेंकट नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. अपने खिलाफ प्रवर्तन निदेशाल (ईडी) की जांच को चुनौती देते हुए अग्रिम जमानत की गुहार लगाते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने सुनवाई के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया. राव के वकील ने कहा कि कथित ठेके दिए जाने के लगभग 2 साल बाद वेंकट नागेश्वर राव को आबकारी विभाग का मंत्री बनाया गया था. उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था. यह शराब को फैक्ट्री से खुदरा विक्रेता तक पहुंचाने के लिए दो यूनिट्स के बीच का सब-कॉन्ट्रैक्ट था.
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पूरे मामले में आपका बेटा, बहू और परिवार के अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं. जबकि आपका दावा है कि आपका इससे कोई लेना-देना नहीं है. यह 300 करोड़ रुपये का शराब नीति घोटाला है.
राव के वकील ने कहा कि उन्होंने जांच में सहयोग किया है. सतर्कता विभाग को जांच में कुछ नहीं मिला. फिर परेशान करने के लिए मामला ईडी को सौंप दिया गया.
इस दौरान वकील की ओर से वेंकट नागेश्वर राव ने कहा कि वे दिल के मरीज हैं. उनका बेटा एक महीने से अधिक समय से हिरासत में है. उनकी मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर मौजूद है. उसमें सारा ब्यौरा दर्ज है. लिहाजा उन्हें रियायत दिया जाए. हालांकि कोर्ट ने उसे सिरे से खारिज कर दिया.