पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान TMC सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में आरोप लगाया कि SIR की आड़ में बहुत लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए. उनका यह भी आरोप है कि SIR में एक विशेष वर्ग के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए.
कल्याण बनर्जी ने कहा कि कई विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों में जितना जीत-हार का अंतर था, उससे ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए. उनका दावा है कि SIR से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है.
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी इस पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि मई तक 38 लाख अपीलें लंबित थी लेकिन इनके निपटारे का काम बहुत ही धीमी गति से हो रहा है. कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि नगर पालिका चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में अगर यही स्थिति रही तो लोग वोट देने से वंचित रह जाएंगे.
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने भी इसपर चिंता जताई है और कहा है कि संसदीय चुनाव से पहले इन सभी अपीलों का निपटारा हो जाना चाहिए.
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में बताया कि करीब 38.10 लाख अपीलें लंबित हैं. जबकि अब तक सिर्फ 83 हजार अपीलों का निपटारा हुआ है. उन्होंने इस पर चिंता जताते हुए बताया कि यह कुल अपीलों का लगभग 2 फीसदी है. उनका कहना है कि लगभग सात लाख लोगों ने मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील दायर की है. वहीं, बड़ी संख्या में ऐसी अपीलें भी हैं जो दूसरों का नाम हटाने या शामिल करने को लेकर है.
यह भी पढ़ें: बंगाल की खाड़ी में डूबा पनामा का जहाज, 24 लोग थे सवार, कोस्ट गार्ड और नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं उनकी अपीलों को प्राथमिकता देनी चाहिए. जस्टिस बागची का कहना है कि इनकी अपीलों को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि नाम हटने से व्यक्ति मताधिकार से वंचित हो जाता है.
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि संसदीय चुनावों से पहले इन अपीलों का निपटारा हो जाना चाहिए. कोर्ट ने SIR अपीलों की संख्या, लंबित मामलों और उनके निपटारे को लेकर चुनाव आयोग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी सवाल किया है कि मतदाता सूची को अपडेट करने और अपीलों के निपटारे के लिए क्या उठा रहा है.