राजनीति में अक्सर पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर हमलावर रहते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ बयान चर्चा का बड़ा विषय बन जाते हैं. इस बार कांग्रेस सांसद शशि थरूर का एक बयान सुर्खियों में है. मालदीव के साथ भारत के रिश्तों का जिक्र करते हुए थरूर ने ऐसा उदाहरण दिया, जिसे कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की विदेश नीति की अप्रत्यक्ष सराहना के तौर पर देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि मुश्किल हालात में मदद करके कैसे देशों के बीच भरोसा मजबूत होता है.
शशि थरूर ने अमेरिका के फ्लेचर स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान मालदीव का 'India Out' वाला पूरा किस्सा सुनाया. उनके ऑफिस की ओर से साझा किए गए वीडियो में थरूर ने कहा कि एक समय मालदीव में भारत के खिलाफ माहौल था, लेकिन संकट के वक्त भारत ने बिना किसी शर्त मदद की. उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है, क्योंकि इसे भारत की पड़ोसी देशों के साथ अपनाई गई नीति के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है.
India Out से पानी संकट तक, थरूर ने सुनाया पूरा मामला
थरूर ने उस दौर को याद किया जब नवंबर 2023 में मोहम्मद मुइज्जू मालदीव के राष्ट्रपति बने थे. मुइज्जू ने चुनाव के दौरान 'India Out' अभियान चलाया था. बाद में उनकी सरकार ने कुछ भारतीय कर्मियों की वापसी की बात कही और भारत से जुड़े कुछ समझौतों की समीक्षा भी शुरू हुई. जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव के कुछ नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा था.
थरूर ने बताया कि इसी दौरान मालदीव की राजधानी माले में पानी साफ करने वाला मुख्य डिसैलिनेशन प्लांट खराब हो गया, जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया. उन्होंने कहा कि भारत ने बिना देर किए लाखों लीटर पीने का पानी भेजा और बदले में कुछ नहीं मांगा. थरूर के मुताबिक, यही तरीका भरोसा बनाने का होता है. उन्होंने कहा कि देशों के रिश्ते सिर्फ बातों से नहीं, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े होने से मजबूत होते हैं.
इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे नरमी देखने को मिली. जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मालदीव दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत को मालदीव का सबसे करीबी और भरोसेमंद साझेदार बताया. दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.
थरूर की यह टिप्पणी इसलिए चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने मालदीव का उदाहरण देकर यह समझाने की कोशिश की कि कूटनीति में कई बार मुश्किल समय में की गई मदद सबसे बड़ा भरोसा बनाती है.