Bihar News: भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में बुधवार 17 जून को भरत तिवारी नाम के युवक का एनकाउंटर कर दिया गया. अब यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है. इस मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बना हुआ है. जहां एक ओर पुलिस इस कार्रवाई को मुठभेड़ बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और स्थानीय लोग इसे फर्जी एनकाउंटर बोल रहे हैं. इसी को लेकर शहर में युवाओं ने कैंडल मार्च निकाला और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन की मांग उठाई.
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आरा के युवा नेता मोनू के नेतृत्व में कतीरा से लेकर जेपी स्मारक तक विशाल कैंडल मार्च और न्याय मार्च निकाला गया. इस मार्च में शामिल युवा हाथों में मोमबत्तियां लेकर चल रहे थे और 'भरत तिवारी अमर रहें' के नारे लगा रहे थे. न्याय की मांग वाले पोस्टर लेकर बड़ी संख्या में युवाओं ने मार्च में हिस्सा लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भरत तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. इस मामले में शामिल आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर कार्रवाई की जाए. युवाओं ने यह भी कहा कि भरत तिवारी व्यवस्था की कथित ज्यादती का शिकार हुए हैं.
जेपी स्मारक पहुंचकर युवाओं ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी. इसी के साथ चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और बड़े तरीके से किया जाएगा. फिलहाल बेलौटी गांव और आसपास का इलाका राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है.
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हर गुजरते दिन के साथ यह मामला संवेदनशील होता जा रहा है. अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन का अगला कदम क्या होता है. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे युवा नेता सह समाजसेवी मोनू सिंह ने कहा कि भरत तिवारी की मौत की निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाए. भरत आम लोगों के लिए सिस्टम से लड़ रहे थे. वे ज्यादती के शिकार हुए हैं.
बता दें कि भरत तिवारी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें हाथों में हथियार लिए पुलिस के सामने नजर आए थे. परिजनों का कहना है कि भरत ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था. इसके बाद भी पुलिस वालों ने उसे गोली मार दी. भरत अपने इलाके के बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठा रहा था. बीएससी करने के बाद वो नौकरी की तैयारी कर रहा था. इसी बीच वह समाजसेवा से जुड़ गया था.