आज की आधुनिक लाइफस्टाइल में शराब पीना या अल्कोहलिक ड्रिंक्स का कभी- कभी सेवन करना आम बात है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसी को शराबी की संज्ञा दे दी जाए. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कब किसी शख्स को शराबी कहा जा सकता है. क्या इसका भी कोई मापदंड है.
असल में डॉक्टर किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए शराबी नहीं मानते कि वह शराब पीता है. किसी को शराब की लत यानी शराबी या फिर मेडिकल टर्म में कहें तो 'एल्कोहल यूज डिसऑर्डर' तब माना जाता है, जब शराब उसके व्यवहार, स्वास्थ्य, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन-से लक्षण बताते हैं कि कोई व्यक्ति सामान्य तौर पर शराब पी रहा है या फिर उसे शराब की लत लग चुकी है?
क्या होता है एल्कोहल यूज डिसऑर्डर?
एल्कोहल यूज डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति शराब पीने पर अपना नियंत्रण खोने लगता है. उसे शराब पीने की ऐसी आदत हो जाती है कि नुकसान होने के बावजूद वह इसे छोड़ नहीं पाता.यह समस्या हल्की, मध्यम या गंभीर हो सकती है. लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है.
ये संकेत बताते हैं कि शख्स शराबी बन गया है
जब किसी का शराब की मात्रा पर नियंत्रण न रहे. अगर कोई व्यक्ति तय करता है कि वह सिर्फ एक या दो पैग पिएगा, लेकिन हर बार उससे ज्यादा पी जाता है, तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है. वह शराब छोड़ना चाहता है, लेकिन छोड़ नहीं पाता.
कई लोग बार-बार शराब कम करने या छोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते. यह भी शराब पीने की लत का एक बड़ा लक्षण माना जाता है.दिन का बड़ा हिस्सा शराब के इर्द-गिर्द घूमना.अगर किसी व्यक्ति का काफी समय शराब खरीदने, पीने या उसके असर से उबरने में बीत रहा है, तो यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती.
बार-बार शराब पीने की तीव्र इच्छा होना. जब शराब न मिलने पर बेचैनी होने लगे या बार-बार पीने का मन करे, तो इसे क्रेविंग कहा जाता है. यह शराब पीने की लत का महत्वपूर्ण संकेत है.
काम, पढ़ाई या परिवार की जिम्मेदारियां प्रभावित होना
अगर शराब की वजह से नौकरी, पढ़ाई, बिजनेस या पारिवारिक जिम्मेदारियां प्रभावित होने लगें, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है. खासकर तब, जब नुकसान पता होने के बावजूद कोई शराब पीना नहीं छोड़ पा रहा है.कुछ लोग जानते हैं कि शराब की वजह से उनकी सेहत, रिश्ते या करियर पर बुरा असर पड़ रहा है, फिर भी वे पीना जारी रखते हैं. यह भी एल्कोहल यूज डिसऑर्डर का लक्षण है. ऐसी परिस्थितियों में वो शराबी कहा जा सकता है.
दोस्तों और शौक से दूरी बनाना
जब व्यक्ति अपने शौक, सामाजिक गतिविधियों या दोस्तों से मिलने-जुलने की बजाय शराब को प्राथमिकता देने लगे, तो यह भी खतरे की घंटी है. साथ ही खतरनाक परिस्थितियों में भी शराब पीना शुरू कर दे, जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना, तैराकी करना या अन्य जोखिम भरे काम करना भी इसकी लत की ओर इशारा कर सकता है.
शराब का पहले जितना असर नहीं होना
शराब की लत बढ़ने पर शरीर उसमें ढलने लगता है. ऐसे में पहले जितनी मात्रा से नशा होता था, उतना असर पाने के लिए व्यक्ति को ज्यादा शराब पीनी पड़ती है. इसे टॉलरेंस कहा जाता है.
फिर शराब न मिलने पर शरीर संकेत देने लगता है. कुछ लोगों को शराब न मिलने पर मतली, पसीना आना, हाथ कांपना या बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. इन्हें विदड्रॉल सिम्पटम कहा जाता है. कई बार लोग इन लक्षणों से बचने के लिए फिर से शराब पी लेते हैं, जिससे लत और गहरी होती जाती है.
बिंज ड्रिंकिंग भी है खतरे की घंटी
विशेषज्ञों के मुताबिक कम समय में बहुत ज्यादा शराब पीना भी खतरनाक माना जाता है.आमतौर पर अगर कोई पुरुष दो घंटे के भीतर पांच या उससे ज्यादा ड्रिंक लेता है, या कोई महिला दो घंटे में चार या उससे ज्यादा ड्रिंक लेती है, तो इसे बिंज ड्रिंकिंग कहा जाता है.यह आदत स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है.
हर शराब पीने वाला शराबी नहीं होता
यही सबसे महत्वपूर्ण बात है. शराब पीना और शराब का आदी होना दो अलग-अलग बातें हैं. असली चिंता तब शुरू होती है, जब शराब पर नियंत्रण खत्म होने लगे और उसकी वजह से जिंदगी में समस्याएं पैदा होने लगें.
अगर किसी व्यक्ति में ऊपर बताए गए कई लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसे सिर्फ आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते मदद और इलाज लेने से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है.