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'ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत', पेट्रोल-सोना वाली अपील पर राहुल और अखिलेश ने PM मोदी को घेरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खर्च घटाने और बचत बढ़ाने की अपील पर विपक्ष हमलावर हो गया है. राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इसे सरकार की आर्थिक विफलता बताया है.

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पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी और आखिलेश यादव ने हमला बोला है. (File Photo: ITG)
पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी और आखिलेश यादव ने हमला बोला है. (File Photo: ITG)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईंधन, विदेश यात्रा से बचने, वर्क फ्रॉम होम और सोने की खरीद से जुड़ा बयान दिया, जिस पर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जहां इसे सरकार की 'नाकामी का सबूत' बताया, तो वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी को ही देश का 'सबसे बड़ा संकट' करार दे दिया.

राहुल गांधी ने कहा कि जनता से सोना न खरीदने, विदेश यात्रा कम करने, पेट्रोल बचाने और खर्च घटाने की अपील दरअसल इस बात का संकेत है कि 12 साल बाद सरकार अर्थव्यवस्था संभालने में विफल रही है.

उधर अखिलेश यादव ने हमला बोलते हुए सवाल उठाया, "अगर अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, तो फिर इतनी पाबंदियों की जरूरत क्यों पड़ रही है."

'ये नाकामी के सबूत हैं...'

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो. ये उपदेश नहीं, ये नाकामी के सबूत हैं."

उन्होंने आगे कहा, "12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए. हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं, जिससे ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें. देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं."

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'भाजपा देश के लिए संकट...'

राहुल गांधी के बाद अखिलेश यादव ने भी 'खर्च में कटौती' की अपील को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए एक लंबी-चौड़ी पोस्ट कर डाली. सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पोस्ट में  कहा, "चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया. दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है- ‘भाजपा’ इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है. डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है."

अखिलेश ने आगे कहा कि सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है. भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं. हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक.

यह भी पढ़ें: 'वर्क फ्रॉम होम' को लेकर क्या बोल गए पीएम मोदी?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा, "वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियां जनता के लिए ही हैं क्या?"

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उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी. सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं.

अखिलेश यादव ने कहा, "अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें. वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है. इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है. किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है. सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है. ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है. दरअसल, वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया."

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, "भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है. नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है. अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है. साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं. इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है. इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी. देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!"

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पीएम मोदी ने क्या कहा है?

हैदराबाद में तेलंगाना एक रैली में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीज़ल का सावधानी से इस्तेमाल करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग करने, ज़्यादा से ज़्यादा EV (इलेक्ट्रिक वाहन) का इस्तेमाल करने, पार्सल भेजने के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया.

नरेंद्र मोदी ने कहा, "युद्ध के कारण पेट्रोल और खाद की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. जब सप्लाई चेन पर दबाव पड़ता है तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं, भले ही सरकार संकट से निपटने के लिए कई कदम उठा रही हो. इसलिए, इस वैश्विक संकट के दौरान, देश को सबसे ऊपर रखते हुए, हमें कुछ संकल्प लेने होंगे."

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि घर से काम करना, वर्चुअल मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे तरीके, जो Covid के दौरान आम हो गए थे, उन्हें फिर से शुरू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमने कोरोना (Covid) के दौरान घर से काम करना, वर्चुअल मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कई अन्य तरीके विकसित किए. हमें इनकी आदत पड़ गई थी. आज की ज़रूरत है कि हम उन तरीकों को फिर से अपनाएं."

पश्चिम एशिया संकट के कारण विदेशी मुद्रा बचाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, पीएम मोदी ने एक साल के लिए सोने की खरीद और विदेश यात्रा को टालने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, "हमें किसी भी तरह से विदेशी मुद्रा बचानी होगी." उन्होंने लोगों से खाने के तेल और रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया.
 

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