पानी की हर बूंद को बचाना है तो सिर्फ सरकारी योजनाओं से काम नहीं चलेगा. लोगों की भागीदारी, नई तकनीक और सही जानकारी भी जरूरी होगी. बुधवार को राष्ट्रीय जल विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानी से जुड़े कई अहम सुझाव दिए. उन्होंने 'जल उत्सव' के जरिए जन-जागरूकता बढ़ाने और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से सही आंकड़े जुटाने की बात कही, ताकि पानी की एक-एक बूंद का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके.
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन पहली ऐसी बैठक थी, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और अधिकारी एक मंच पर आए. इसका सीधा मकसद पानी के मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के तालमेल को मजबूत करना था. चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यहां तय की गई बातें सिर्फ कागजों में सिमटकर न रह जाएं. उन्होंने समय सीमा तय कर काम निपटाने, लगातार समीक्षा करने और फैसलों पर बराबर नजर बनाए रखने की बात कही, ताकि यह सम्मेलन महज रस्म अदायगी बनकर न रह जाए.
‘जल उत्सव’ से लोगों को जोड़ने पर जोर
इस दौरान, प्रधानमंत्री ने पानी बचाने की पूरी मुहिम को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया. इसके लिए उन्होंने 'जल उत्सव' को घर-घर तक ले जाने की बात कही, जिससे समाज का हर तबका जल संरक्षण की अहमियत समझ सके. साथ ही उन्होंने तालाबों और जलाशयों में जमी गाद (जमा कीचड़) की नियमित सफाई की जरूरत बताई. उनका कहना था कि कीचड़ निकालने का काम किसी तय नियम और मानक प्रक्रिया (SOP) के तहत होना चाहिए.
बांधों की हिफाजत को लेकर उन्होंने मानसून से पहले पुख्ता तैयारी रखने की सलाह दी. उनका मानना था कि बांध सुरक्षा को लेकर बच्चों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है, जिसके लिए इस विषय को स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.
पानी बचाने वाली तकनीक अपनाने की जरूरत
शहरों के बढ़ते विस्तार के साथ पानी की जरूरत भी बढ़ रही है. पीएम मोदी ने शहरी स्थानीय निकायों को इस चुनौती के लिए तैयार करने की बात कही. उन्होंने इनके लिए भी चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया. इसके अलावा, उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीक को ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया. साथ ही प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के जरिए दुनिया में इस्तेमाल हो रही बेहतर तकनीकों को समझने की बात कही, ताकि भारत में भी ऐसी तकनीकें विकसित कर बड़े स्तर पर इस्तेमाल की जा सकें.
पानी के आंकड़ों में AI की मदद
पानी से जुड़े डेटा के सही प्रबंधन पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि आंकड़ों को व्यवस्थित करने और उनकी पड़ताल के लिए AI तकनीक का सहारा लेना चाहिए. उन्होंने देशभर में एक समान प्रारूप पर डेटा जुटाने का सुझाव दिया. साथ ही पानी के संकट से पहले ही निपटने की रणनीति बनाने पर जोर देते हुए कहा कि शोधित यानी ट्रीटेड पानी को उद्योगों और सिंचाई के काम में लाकर साफ पानी की बड़ी बचत की जा सकती है.
पीएम मोदी ने राज्यों के बीच एक-दूसरे के बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करने का फॉर्मूला दिया. उन्होंने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधियों, अफसरों और किसानों को उन जगहों के अध्ययन दौरे पर भेजा जाए, जहां पानी बचाने का शानदार काम हुआ है, ताकि वे वहां से सीखकर अपने इलाकों में भी वही मॉडल लागू कर सकें. गुजरात के अपने पुराने दिनों का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने साफ किया कि पानी की कितनी भी बड़ी किल्लत हो, अगर पुख्ता योजना, सही संसाधन और काबिल अफसर मैदान में हों, तो इस संकट को भी बड़े अवसर में बदला जा सकता है.
जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सम्मेलन के चार प्रमुख नतीजे बताए. इनमें पानी से जुड़े ढांचागत प्रोजेक्ट जल्द पूरे करना, जल संरक्षण को लोगों का लगातार चलने वाला अभियान बनाना, पीने के पानी के स्रोतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना शामिल है.
ग्रामीण इलाकों की पेयजल योजनाओं का सही संचालन और रखरखाव भी इन लक्ष्यों में शामिल रहा. यानी सम्मेलन का जोर सिर्फ पानी बचाने पर नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी को सही तरीके से संभालने पर भी रहा.