ऑपरेशन सिंदूर के छह शहीदों को सम्मान न देने के कांग्रेस के आरोप पर रक्षा मंत्रालय ने सफाई दी है. मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश ने इन शहीदों को सबसे पहले मौके पर ही सम्मान दिया था और उनकी याद को हमेशा सम्मान और श्रद्धा के साथ याद रखा जाएगा.
यह विवाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के एक आरोप से शुरू हुआ. खेड़ा ने शुक्रवार और शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह जवानों की कुर्बानी को एक साल तक छिपाकर रखा और उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया. उन्होंने शुक्रवार को एक खबर का लिंक भी शेयर किया था.
इस आरोप के जवाब में रक्षा मंत्रालय ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में गलत तरीके से यह बताया गया कि इन छह जवानों की कुर्बानी को अभी हाल में पहली बार सामने लाया गया है.
मंत्रालय ने साफ किया कि देश ने इन शहीदों को बहुत पहले ही सम्मान दे दिया था. 11 मई 2025 को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स ने इन जवानों को श्रद्धांजलि दी थी और उनकी कुर्बानी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था.
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इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस रिलीज में इन जवानों को वीरता पुरस्कार देने की बात भी छपी थी. सेना के सोशल मीडिया पेज पर भी इनकी तारीफ की गई थी. इसी साल 15 जनवरी को जयपुर में हुई आर्मी डे परेड में सेना प्रमुख ने तीन जवानों के परिवारों को सेना मेडल दिया था. वहीं वायुसेना प्रमुख ने 8 अक्टूबर 2025 को एक समारोह में यह सम्मान दिया था.
मंत्रालय ने यह भी बताया कि इन छह जवानों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल की दीवार पर लिखे जा चुके हैं. इनमें सेना के पांच जवान सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं. ऑपरेशन सिंदूर पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए चलाया गया था.
मंत्रालय ने कहा कि शहीदों के नाम मेमोरियल पर लिखने की एक तय प्रक्रिया होती है, जिसका पूरी सावधानी से पालन किया जाता है. मंत्रालय ने इस विवाद को गलत और अफसोसजनक बताया और कहा कि इससे शहीद परिवारों को तकलीफ पहुंचती है.