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CJP प्रदर्शन में बच्चों के इस्तेमाल पर NHRC सख्त, FIR दर्ज करने के आदेश

मुंबई में 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और उनकी तस्वीरें-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की शिकायत पर NHRC ने संज्ञान लिया है. आयोग ने मुंबई पुलिस, MeitY, X Corp. और महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर जांच के निर्देश दिए हैं.

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मुंबई में सीजेपी का प्रदर्शन हुआ था.(Photo-PTI)
मुंबई में सीजेपी का प्रदर्शन हुआ था.(Photo-PTI)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हुए एक सार्वजनिक प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और बाद में उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की शिकायत पर संज्ञान लिया है. यह कार्रवाई मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत की गई है. मामले पर NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने विचार किया.

यह शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने दर्ज कराई है. शिकायत में सोशल मीडिया पर सामने आए ऐसे कंटेंट का जिक्र है, जिसमें कथित तौर पर एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाया गया था और उकसाने वाले नारे लगाए जा रहे थे. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर पहले से ग्रुप और चैट में चर्चा हुई थी. शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि पुलिस की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों की नाबालिग स्थिति का इस्तेमाल ढाल के तौर पर किया गया हो सकता है.

इस मामले में NHRC ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत में X Corp. के ग्रिवांस ऑफिसर और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है.

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मुंबई पुलिस को जांच के निर्देश

NHRC ने मुंबई पुलिस को तस्वीरों, वीडियो, सोशल मीडिया कंटेंट और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच करने के निर्देश दिए हैं. आयोग ने कहा है कि जहां कॉग्निजेबल ऑफेंस सामने आता है, वहां FIR दर्ज की जाए. पुलिस को यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि बच्चे किन परिस्थितियों में प्रदर्शन में शामिल हुए और इसमें आयोजकों, कोऑर्डिनेटरों, साथ मौजूद वयस्कों और उनकी भागीदारी में मदद करने वाले अन्य लोगों की क्या भूमिका थी.

आयोग ने कथित ग्रुप और चैट की जानकारी को सुरक्षित रखने और उसकी फॉरेंसिक जांच कराने का भी निर्देश दिया है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि नाबालिगों की भागीदारी पहले से तय थी या नहीं और क्या उनकी नाबालिग स्थिति का इस्तेमाल पुलिस की कानूनी कार्रवाई से बचने, उसे सीमित करने या रोकने के लिए किया गया था.

इसके साथ ही NHRC ने किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 और 83(2) लागू होने की संभावना के साथ अन्य संबंधित कानूनों की भी जांच के निर्देश दिए हैं. बच्चों से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को प्रसारित करने और इन्हें साझा करने वाले अकाउंट की भी जांच की जाएगी. X Corp. और MeitY को संबंधित डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने और बच्चों की सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़े नियमों के पालन की जांच करने को कहा गया है.

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बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्देश

महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों के बचाव, देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. जरूरत पड़ने पर बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा. वहां उन्हें काउंसलिंग, मनोसामाजिक सहायता, देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास दिया जाएगा. इस दौरान बच्चों की पहचान, निजता और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है.

NHRC ने पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता, गरिमा और उनके हितों की सुरक्षा के निर्देश दिए हैं. संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी गई है. आरोपों की जांच संबंधित अधिकारी करेंगे और जिम्मेदारी, यदि कोई बनती है, तो जांच में जुटाए गए सबूतों के आधार पर तय की जाएगी. 

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