नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की बेंगलुरु पीठ ने थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (TLPL) को झटका दिया है. ट्रिब्यूनल ने कंपनी की दिवालिया कार्यवाही के दौरान नीलाम की गई संपत्तियों पर पूर्ण रोक (फ्रीज) लगा दी है. टीएलपीएल बायजू (Byju's) की मूल कंपनी है.
यह फैसला उन गंभीर आरोपों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया है कि लगभग 150 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को महज चार दिनों की नीलामी में सिर्फ 16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया.
रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (RP) शैलेंद्र अजमेरा और सफल बोलीदाता कॉमप्रिंट टेक सॉल्यूशंस को 21 सितंबर 2026 की अगली सुनवाई तक सभी नीलाम की गई वस्तुओं को उनकी मौजूदा स्थिति में बनाए रखने का निर्देश दिया गया है. खरीदार कॉमप्रिंट को एक सप्ताह के भीतर खरीदी गई सभी वस्तुओं की पूरी लिस्ट, उनके भंडारण का पता और तस्वीरें जमा करनी होंगी.
ट्रिब्यूनल ने कहा कि नीलाम की गई कई वस्तुओं के स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. साथ ही आशंका जताई कि तीसरे पक्ष की संपत्तियों को भी नीलामी में शामिल किया गया हो सकता है.
धोखाधड़ी और जल्दबाजी में बिक्री के अलावा संपत्तियों से वंचित करने का आरोप भी है. Byju’s K3 एजुकेशन के वकीलों ने आरोप लगाया कि RP ने कंपनी को उसकी अपनी समाधान प्रक्रिया के लिए आवश्यक संपत्तियों से धोखे से वंचित किया है.
निलंबित निदेशकों की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि चार दिनों के भीतर बिक्री पूरी करना दिवालियापन नियमों (Regulation 29) का उल्लंघन है.
तीसरे पक्ष के अधिकारों के हनन का दावा करते हुए कहा गया है कि IBC की धारा 18(1)(f) के तहत, RP का नियंत्रण केवल कॉर्पोरेट देनदार की संपत्तियों तक सीमित होता है.
वहीं RP के प्रतिनिधियों का कहना है कि नीलाम की गई सभी वस्तुएं TLPL की थीं. बिक्री को लेनदारों की समिति (CoC) की ओर से मंजूरी दी गई थी और दावेदार स्वामित्व साबित करने में विफल रहे हैं. ट्रिब्यूनल 21 सितंबर को अगली सुनवाई में इन दावों पर विचार करेगा.