दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद सिनेमा जगत से लेकर सियासी गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई है. NCP-SP के अध्यक्ष शरद पवार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि अर्पित की है. दोनों नेताओं ने उनके साथ बिताए पलों और उनके सादगी भरे जीवन के कई यादगार किस्से शेयर किए है.
शरद पवार ने पणजी के पास गोवा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (GMCH) पहुंचकर नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने कला और रंगमंच के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया और हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तैयार रहते थे.
महाराष्ट्र के सूखे के दिनों को याद करते हुए शरद पवार ने कहा, 'मुझे याद है कि जब महाराष्ट्र में सूखा पड़ा था, तब नाना और मकरंद अनासपुरे ने नाम फाउंडेशन की स्थापना की थी और जल संकट से जूझ रहे किसानों की खुलकर मदद की थी.'
पवार ने बताया कि पुणे में रहने के दौरान उनके और उनके परिवार के साथ नाना पाटेकर के बेहद गहरे और पुराने संबंध थे. उन्होंने कहा कि नाना अब हमारे बीच नहीं हैं, न पुणे में, न गोवा में और न ही हम सबके साथ.
फारूक अब्दुल्ला ने शेयर किए कश्मीर से जुड़ी यादें
उधर, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया. उन्होंने अभिनेता को एक नेक इंसान बताते हुए कहा कि वो कभी मजहब देखकर मदद नहीं करते थे, बल्कि हमेशा गरीबों और वंचितों के दर्द को दूर करने में अपना जीवन समर्पित करते रहे.
नाना पाटेकर के साथ अपने रिश्तों को याद करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने एक पुराना किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा, 'वो मेरे बहुत अच्छे दोस्त और एक नेक इंसान थे. वो खुद आदिवासी गांवों में जाकर रहते थे.' उन्होंने बताया कि जब नाना एक बार कश्मीर आए थे, तो वो उन्हें कुपवाड़ा ले गए थे. उस समय जनरल पांथकर वहां कमांडर थे और वहां से वो उन्हें हेलीकॉप्टर से गुरेज और मुश्कोह घाटी घुमाने ले गए थे.
'सादगी और लोगों के दर्द को पहचानने की काबिलियत...'
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'जब भी वो कश्मीर आते थे, हम अक्सर मिलते थे. एक बार उन्होंने यहां एक शादी में भी शिरकत की थी और मुझे उनके साथ डांस करने का मौका मिला था.' अब्दुल्ला ने उनकी दरियादिलों की तारीफ करते हुए कहा कि भगवान की कृपा से उनमें एक जबरदस्त खूबी थी- सादगी और लोगों के दर्द को पहचानने की अद्भुत काबिलियत.
उन्होंने बताया कि अभिनेता ने अपनी आखिरी शूटिंग भी अभी हाल ही में गोवा में पूरी की थी.
नाना पाटेकर का ये जनसेवा का भाव सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि जमीन पर भी साफ झलकता था. महाराष्ट्र के बीड जिले की राजश्री आसाराम परदेशी जैसी हजारों महिलाओं के लिए उनका जाना एक बड़े नुकसान जैसा है.
महिला ने बताया नाना को बताया 'फरिश्ता'
बीड के सूखाग्रस्त इलाकों में जब आत्महत्या की घटनाओं और भुखमरी ने परिवारों को तोड़ दिया था, तब नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे के 'नाम फाउंडेशन' ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीनें, चक्कियां और मवेशी मुहैया कराए थे.
लगभग 10 साल पहले फाउंडेशन से मिली सिलाई मशीन को याद करते हुए राजश्री की आंखें नम हो गईं. उनके पति एक मजदूर थे जो ऊंचाई से गिरकर बिस्तर पर आ गए थे, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी राजश्री पर आ गई थी.
यह भी पढ़ें: पापा नाना पाटेकर को खोकर टूटा परिवार, रोते-बिलखते अस्पताल पहुंचा भतीजा, दोस्तों ने संभाला
उन्होंने कहा, 'साड़ियों की हेमिंग और ब्लाउज सिलकर मैं हर दिन लगभग 400 से 500 रुपये कमाती हूं, यानी महीने में लगभग 10,000 रुपये. ये सब नाना पाटेकर की वजह से मुमकिन हुआ. आज सुबह मशीन को छूते ही मेरी धड़कनें तेज हो गईं. जिस आदमी ने हमारे घर में लक्ष्मी लाई, हमारा फरिश्ता, वो अब हमारे बीच नहीं रहा.'