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मॉनसून की रफ्तार पर क्यों लगा ब्रेक? मौसम विभाग ने बताए ये 5 बड़े फैक्टर

Monsoon 2026: कोंकण और मध्य महाराष्ट्र जैसे इलाकों में मॉनसून कई दिनों से अटका हुआ है. किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मॉनसून की रफ्तार पर ब्रेक क्यों लगा? मौसम विभाग ने पांच बड़े फैक्टर्स बताए हैं जो इस बार मॉनसून को कमजोर कर रहे हैं.

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देशभर में 4 जून से 18 जून तक 41% बारिश की कमी दर्ज की गई (File Photo- ITG)
देशभर में 4 जून से 18 जून तक 41% बारिश की कमी दर्ज की गई (File Photo- ITG)

देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 4 जून को केरल पहुंच गया था लेकिन उसके बाद इसकी रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है. जून के मध्य तक कई इलाकों में बारिश की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति उलट है. मॉनसून महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्से में रुक गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 4 जून से 18 जून तक 41 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. 

IMD के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, इस अवधि में देश में सिर्फ 42.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 72.2 मिलीमीटर होनी चाहिए थी. मौसम विभाग की क्षेत्रीय जानकारी के मुताबिक, मध्य भारत में बारिश की 67 प्रतिशत कमी है. जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 42 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 6 प्रतिशत बारिश की कमी है.

मौसम विभाग ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से मॉनसून महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाया है. कोंकण और मध्य महाराष्ट्र जैसे इलाकों में मॉनसून कई दिनों से अटका हुआ है.

मौसम विभाग ने मॉनसून के कमजोर होने के पीछे पांच बड़े फैक्टर्स बताए हैं.

1- अरब सागर से मजबूत हवा का अभाव और अल-नीनो का प्रभाव
मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि अभी मॉनसून की हवा में अरब सागर से हवा का मजबूत सर्ज नहीं आ रहा है. ऐसी तेज हवाएं आमतौर पर ज्यादा नमी लाती हैं, जिससे बड़े स्तर पर बारिश होती है और मॉनसून आगे बढ़ता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल नीनो है.

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2- कमजोर दक्षिण-पश्चिमी हवाएं
अरब सागर के ऊपर निचली स्तर की हवाएं कमजोर हो गई हैं, जिससे महाराष्ट्र के तट और अंदरुनी इलाकों में नमी कम पहुंच रही है. उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत से सूखी हवाएं (ड्राई वेस्टर्ली विंड्स) मॉनसून क्षेत्र में घुस रही हैं. इन हवाओं में नमी नहीं होती, इसलिए बादल नहीं बन पाते और बारिश रुक जाती है. वहीं, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) भी बार-बार आ रहे हैं, जिससे उत्तर भारत में बारिश हो रही है लेकिन मुख्य मॉनसून क्षेत्र सूखा है.

3- मौसम प्रणालियों का अभाव
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाले क्षेत्र या चक्रवाती सर्कुलेशन नहीं बन रहे हैं. साथ ही पश्चिमी तट पर ऑफशोर ट्रफ (निम्न दबाव की पट्टी) भी मजबूत नहीं है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करती है. 

4- क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो कमजोर
पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में भूमध्य रेखा पार करने वाली हवाएं कमजोर पड़ गई हैं, जो मॉनसून के लिए नमी का मुख्य स्रोत हैं. ऐसे में मॉनसून की गतिविधि घट गई है.

5- मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की कमजोर स्थिति
एक ऐसी मौसम प्रणाली है जो 30-60 दिनों में हिंद महासागर के ऊपर से गुजरती है और बादल-बारिश बढ़ाती है. इस बार MJO कमजोर है और हिंद महासागर से दूर 
है. जिससे दक्षिण भारत में बादल कम बन रहे हैं और बारिश प्रभावित हो रही है.

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खरीफ फसलों पर खतरा
मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 4-5 दिनों तक महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में बारिश छिटपुट (isolated) ही होगी. मॉनसून की धीमी रफ्तार और प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति बनने से भारत में बारिश कम होने का खतरा बढ़ गया है. खरीफ फसलें (जैसे धान, मक्का, सोयाबीन आदि) समय पर बारिश पर निर्भर करती हैं. बारिश न होने से इन फसलों को नुकसान हो सकता है. 

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