तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मेकेदातु बांध बनाने के कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव के सिलसिले में केंद्र सरकार के अधिकारियों के किए गए साइट निरीक्षण को लेकर अपनी चिंता जताई.
उन्होंने मांग की है कि सह-बेसिन से जुड़े राज्यों की सहमति के बिना कोई भी कानूनी या प्रशासनिक मंजूरी न दी जाए और साथ ही तमिलनाडु के कावेरी बेसिन में पानी की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है.
सीएम विजय ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि केंद्र सरकार के अधिकारियों के किए गए साइट निरीक्षण ने कावेरी डेल्टा के किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. ये किसान पहले से ही पानी की कमी वाले इस साल (2026-27) संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि कर्नाटक ने तमिलनाडु को प्रो-राटा बेसिस पर भी उसका उचित हिस्सा देने से इनकार कर दिया है.
सीएम ने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि मंथली रिलीज की मात्रा और तय पैटर्न दोनों के संबंध में निचले तटवर्ती राज्यों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहें.
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इसलिए, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि कर्नाटक की जमा की गई मेकेदातु परियोजना की DPR पर विचार या जांच करना, या इस समय केंद्रीय एजेंसियों का कोई एकतरफा तकनीकी मूल्यांकन या साइट निरीक्षण करना बिल्कुल अनुचित है.
विजय ने अंतर-राज्यीय सीमा के ठीक ऊपर कावेरी नदी पर 67.16 टीएमसी की विशाल क्षमता वाला मेकेदाटू जलाशय बनाने के कर्नाटक के प्रपोजल का विरोध किया.
उन्होंने कहा कि इससे न केवल राज्य में पानी का प्रवाह रुकेगा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की तय गाइडलाइन्स के मुताबिक मिलने वाली मंथली डिलीवरी भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.