करवा देंगे नहीं, करवा दीजिए... यह एक मासूम बच्चे का जवाब था, जिसने कुछ दिन पहले लखीमपुर खीरी के संपूर्ण समाधान दिवस में बैठे डीएम अंजनी कुमार सिंह को भी कुछ पल के लिए निरुत्तर कर दिया था. कक्षा आठ में पढ़ने वाले 13 वर्षीय अमिताभ गुप्ता का वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने देखा. उसकी बेबाकी, गरीबी से लड़ने का जज्बा और अपने हक के लिए निडर आवाज ने उसे इंटरनेट पर 'वायरल बॉय' बना दिया. लेकिन वायरल होने के बाद क्या उसकी जिंदगी बदल गई? क्या उसके घर का बंद ताला खुल गया? क्या उसकी फरियाद सुनी गई? जवाब है नहीं.
पांच दिन बाद फिर डीएम के पास पहुंचा अमिताभ
वीडियो वायरल होने के बाद उम्मीद थी कि समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा. लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ. मंगलवार को अमिताभ अपनी मां संध्या गुप्ता और रिश्तेदारों के साथ फिर डीएम कार्यालय पहुंचा. अमिताभ बताता है कि अधिकारियों ने इस बार उसके सभी कागजात देखे. उसे यह भी बताया गया कि मामले का समाधान किस तरह हो सकता है. लेकिन जिस कमरे पर ताला लगा है, वह अब भी नहीं खुला है.
वायरल वीडियो से घर तक... कहानी अब भी अधूरी
आजतक की टीम जब अमिताभ के घर पहुंची तो वहां कैमरे में कई तस्वीरें कैद हुईं. एक तरफ बीमार पिता बिस्तर पर लेटे थे. दूसरी ओर अमिताभ अपनी मां के साथ बैठकर लिफाफे बना रहा था. घर के एक हिस्से पर लगा ताला अब भी उसकी नजरों के सामने था. अमिताभ उसी ताले की तरफ इशारा करते हुए कहता है, यही ताला खुलवाने के लिए मैं डीएम साहब के पास गया था. अमिताभ की मां संध्या गुप्ता बताती हैं कि उन्होंने पहले भी कई बार अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया था. लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई. वह कहती हैं, हमने तो उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन हमारा बेटा हमारा दर्द नहीं देख पाया. वह बिना बताए तहसील दिवस में चला गया और डीएम साहब को आवेदन दे आया. संध्या गुप्ता के मुताबिक शिकायत के बाद पुलिस अधिकारी घर जरूर आए, लेकिन ताला अब तक नहीं खुला. उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें डांटने की कोशिश की. डर की वजह से उन्होंने उस समय कह दिया था कि उनका बेटा पढ़ाई में ठीक नहीं है, जबकि सच्चाई यह है कि बेटा अपनी समझ से न्याय मांगने गया था.
गरीबी ऐसी कि पूरा परिवार बनाता है लिफाफे
अमिताभ का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है. मां घर पर बैठकर लिफाफे बनाती हैं. इसी काम से परिवार का खर्च चलता है. वह कहती हैं, हम इतने गरीब हैं कि बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार सोचते हैं कि पहले घर चलाएं या बच्चों को पढ़ाएं. घर में बीमार पिता हैं. कमाने वाला कोई नहीं. ऐसे में अमिताभ भी मां का हाथ बंटाता है.
मैं आईएएस बनूंगा
अमिताभ की उम्र भले 13 साल हो, लेकिन उसके सपने बड़े हैं. आजतक से बातचीत में वह कहता है, मैं आईएएस बनना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि आगे चलकर गरीब लोगों की मदद करूं. हर व्यक्ति को अपने अधिकार के लिए बोलने का हक है. उसकी आंखों में अधिकारी बनने का सपना साफ दिखाई देता है. शायद यही सपना उसे डीएम के सामने भी बेखौफ बोलने की ताकत देता है.
कैसे वायरल हुआ था अमिताभ
कुछ दिन पहले लखीमपुर खीरी की सदर तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस चल रहा था. अधिकारी फरियाद सुन रहे थे. इसी दौरान कक्षा आठ का छात्र अमिताभ सीधे डीएम अंजनी कुमार सिंह के सामने पहुंच गया. उसने बताया कि उसके पिता मानसिक रूप से बीमार हैं. परिवार जिस संयुक्त मकान में रहता है, उसके एक हिस्से पर रिश्ते की ताई ने ताला लगा रखा है. कई बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई. डीएम ने उससे पूछा, अकेले आए हो. अमिताभ ने बिना झिझक जवाब दिया, जी. इसके बाद दोनों के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ.
अमिताभ की शिकायत सुन कर जब अधिकारी ने कहा कि करवा देंगे, तब अमिताभ ने तुरंत जवाब दिया कि करवा देंगे नहीं... करवा दीजिए जल्दी. यही एक लाइन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल हुई. लोगों ने कहा कि जिस आत्मविश्वास से यह बच्चा अपने अधिकार की बात कर रहा है, वह कई बड़ों में भी नहीं होता. बातचीत के दौरान डीएम ने अमिताभ से कहा कि अभी उसकी उम्र पढ़ाई करने की है और उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. इस पर अमिताभ ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताते हुए कहा कि घर की हालत ऐसी नहीं है कि पढ़ाई आसानी से हो सके. मां की कमाई बहुत कम है और उसी से घर चलाना पड़ता है.
अब भी समाधान का इंतजार
अमिताभ और उसकी मां की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है. उनका कहना है कि इस बार अधिकारियों ने दस्तावेज देखे हैं और समाधान का रास्ता बताया है. परिवार को उम्मीद है कि अब जल्द ही उनके हिस्से का बंद ताला खुलेगा और उन्हें अपने घर का पूरा हिस्सा मिल सकेगा.