कोलकाता की एक प्रमुख सड़क का नाम बदलने को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. कोलकाता नगर निगम ने पार्क सर्कस इलाके में स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर अब गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नगर निगम की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि केएमसी क्षेत्र में आने वाली सुहरावर्दी एवेन्यू को अब गोपाल मुखर्जी रोड के नाम से जाना जाएगा. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का तारीफ करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि कल पश्चिम बंगाल दिवस के खास मौके पर कोलकाता नगर निगम द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फेैसले की तारीफ करता हूं.
उन्होंने कहा कि ये फैसला एक ऐतिहासिक गलती को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा. सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम अब बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया जाएगा. साथ ही, उन्होंने बताया कि गोपाल मुखर्जी ने हजारों निर्दोष लोगों की रक्षा की थी और ये उनके सम्मान में रखा गया है.
विपक्ष ने फैसले पर उठाए सवाल
सड़क का नाम बदलने के फैसले की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और CPI(M) ने आलोचना की है. विपक्षी दलों का कहना है कि ये फैसला इतिहास के साथ छेड़छाड़ है. विपक्षी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने हसन सुहरावर्दी और हुसैन शहीद सुहरावर्दी के बीच भ्रम पैदा कर दिया है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इन बीजेपी नेताओं को हसन सुहरावर्दी और हुसैन सुहरावर्दी के बीच का फर्क तक नहीं पता. ये उनकी अज्ञानता को दिखाता है. इसके अलावा कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि हसन सुहरावर्दी कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर थे और उनके बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस पद पर आए. उन्होंने तर्क दिया कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड बिल्कुल साफ हैं.
नाम को लेकर पुराना इतिहास बना विवाद की वजह
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी से पहले कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर थे. बीजेपी किस तरह की सस्ती राजनीति कर रही है? और क्या बंगाली लोग इस पर यकीन कर रहे हैं?
CPI(M) के अनुसार, नाम बदलने का ये फैसला एक ऐतिहासिक रूप से गलत कहानी पर आधारित है कि इस एवेन्यू का नाम हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था. रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पार्टी ने कहा कि तत्कालीन कलकत्ता कॉर्पोरेशन ने 8 मार्च 1933 को इस सड़क का नाम हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखने का प्रस्ताव पास किया था और ये फैसला उसी साल 20 अप्रैल को सरकारी गजट में प्रकाशित हुआ था.
इस कदम को इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताते हुए CPI(M) ने मांग की है कि इस फैसले को वापस लिया जाए और एवेन्यू के नाम के पीछे की ऐतिहासिक सच्चाई को जनता के सामने लाया जाए.