पूजा के बाद मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूल और मालाएं अब कूड़े के ढेर या गंगा में नहीं फेंकी जाएंगी. कोलकाता नगर निगम (KMC) एक नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत मंदिरों से निकलने वाले फूल-मालाओं को रिसाइकिल कर हर्बल अबीर और ईको-फ्रेंडली अगरबत्ती बनाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट को पश्चिम बंगाल नगर विकास एवं नगर मामलों के विभाग का तकनीकी और बुनियादी ढांचा सहयोग मिलेगा.
नगर मामलों के विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य मंदिरों से निकलने वाले फूलों के कचरे से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को कम करना और साथ ही महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है. अधिकारी ने बताया कि मंदिरों में पूजा के बाद फूल और मालाएं आमतौर पर फेंक दी जाती हैं. अब इन्हें अलग से इकट्ठा किया जाएगा और इनसे हर्बल अबीर और पर्यावरण के अनुकूल अगरबत्तियां तैयार की जाएंगी. परियोजना के शुरुआती चरण में कम से कम 15 महिलाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है.
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों को फूलों के प्रोसेसिंग और उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण देने के लिए खास वर्कशॉप भी आयोजित की जाएंगी. प्रशिक्षण के बाद महिलाएं इन उत्पादों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगी, जिससे उन्हें स्थायी आय का स्रोत भी मिलेगा. अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में मंदिरों से निकलने वाले फूलों का एक बड़ा हिस्सा कूड़ा संग्रह केंद्रों तक पहुंच जाता है. कई बार ये फूल और मालाएं गंगा नदी या अन्य जल स्रोतों में भी फेंक दी जाती हैं, जिससे जल प्रदूषण के साथ-साथ शहर के पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. नई परियोजना से इस समस्या को काफी हद तक कम करने की उम्मीद है.
कोलकाता नगर निगम इससे पहले भी विभिन्न प्रकार के कचरे के रिसाइक्लिंग पर काम कर चुका है. नगर निगम ने जैविक कचरे से बायोगैस, बेकार सामग्री से फूलदान और पेवर ब्लॉक जैसे उत्पाद तैयार करने की परियोजनाएं शुरू की हैं. अधिकारी ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण होगी.
इससे मंदिर परिसर साफ-सुथरे रहेंगे, लैंडफिल और जल स्रोतों में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होगी और महिलाओं के लिए रोजगार का एक स्थायी माध्यम भी तैयार होगा. नगर निगम का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो भविष्य में इसे शहर के अधिक मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों तक भी विस्तारित किया जा सकता है.