scorecardresearch
 

निपाह के मरीजों को कहीं एक्सपायरी इंजेक्शन तो नहीं लगा? केरल में अब होगी जांच

निपाह जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जिस दवा से इलाज दिया गया, अब उसी की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं. केरल में 2021 में खरीदी गई रेमडेसिविर की कुछ शीशियों की एक्सपायरी मई 2023 में खत्म हो चुकी थी, जबकि अस्पताल में 2025 तक इसके इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है. अब सरकार यह पता लगाएगी कि कहीं मरीजों को एक्सपायर दवा तो नहीं दी गई और क्या इसका उनकी मौत से कोई संबंध था.

Advertisement
X
निपाह मरीजों की दवा पर सवाल उठ रहे हैं (Representational)
निपाह मरीजों की दवा पर सवाल उठ रहे हैं (Representational)

केरल में निपाह मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हुई रेमडेसिविर दवा को लेकर विवाद गहरा गया है. आरोप है कि कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में कुछ मरीजों को ऐसी दवा दी गई, जिसकी एक्सपायरी डेट पहले ही निकल चुकी थी. विधानसभा में यह मामला उठने के बाद अब राज्य सरकार ने विशेषज्ञ समिति से जांच कराने का फैसला किया है. स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने शुक्रवार को कहा कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

मंत्री ने साफ किया कि फिलहाल जांच का मुद्दा रेमडेसिविर की गुणवत्ता या असर नहीं, बल्कि यह है कि मरीजों को दवा उसकी तय अवधि खत्म होने के बाद तो नहीं दी गई. सरकार यह भी पता लगाएगी कि एक्सपायरी दवा लेने वाले मरीजों को कोई नुकसान हुआ या नहीं और क्या कुछ मरीजों की मौत का इससे कोई संबंध था.

मंत्री ने गुरुवार को विधानसभा में बताया था कि केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (KMSCL) ने 3 जून 2021 को करुण्या योजना के तहत रेमडेसिविर की 3,000 शीशियां खरीदी थीं. इनकी कीमत करीब 42 लाख रुपये थी. दवा की एक्सपायरी डेट 30 मई 2023 थी.

यह भी पढ़ें: केरल: जिस टीचर ने लगाया खाने में कीड़े का आरोप, वो गिरफ्तारी के बाद सस्पेंड

कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में 102, 2024-25 में 34 और 2025-26 में 10 शीशियों का इस्तेमाल हुआ. हालांकि, 2026-27 में इस्तेमाल की गई 50 शीशियां अलग से 12 जून 2026 को बहरीन से खरीदी गई थीं. ऐसे में सरकार को शक है कि 2023, 2024 और 2025 में इस्तेमाल हुई कुछ शीशियां एक्सपायर हो चुकी थीं.

Advertisement

खरीद से लेकर सप्लाई तक होगी जांच

मुरलीधरन ने बताया कि डॉ. अरविंद की अगुवाई वाली विशेषज्ञ समिति दवा की खरीद, सप्लाई और इसमें शामिल बिचौलियों की भूमिका की जांच करेगी. KMSCL की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में होगी. यह भी पता लगाया जाएगा कि दवा के पैकेट पर क्लिनिकल ट्रायल के इस्तेमाल का जिक्र क्यों था.

मंत्री के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने उन्हें बताया कि दवा की पैकेजिंग पर एक्सपायरी डेट तो लिखी थी, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग डेट नहीं थी. दवाओं के पैकेट पर दोनों जानकारियां होना जरूरी है. सरकार इस गड़बड़ी की भी पड़ताल करेगी.

तीन साल में 11 निपाह मरीजों की मौत

केरल में 2023 में निपाह के 6 मामले सामने आए थे, जिनमें 2 मरीजों की मौत हुई. 2024 में मिले दोनों मरीजों ने दम तोड़ दिया. 2025 में सामने आए 3 मामलों में से 2 मरीजों की जान नहीं बच सकी. हालांकि 2026 में सामने आए एक मरीज की हालत में सुधार हुआ और वह ठीक हो गया.

सरकार ने स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन निदेशालय को निर्देश दिए हैं कि उन सभी मरीजों की जानकारी जुटाई जाए, जिन्हें अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में रेमडेसिविर दी गई थी. अब विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट से साफ होगा कि दवा के इस्तेमाल में नियमों की अनदेखी हुई थी या नहीं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement