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क़ानून मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, मोदी सरकार की क्या तैयारी: दिन भर, 18 मई

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू से लॉ मिनिस्ट्री वापस ले ली गई है, अर्जुन राम मेघवाल उनकी जगह लेंगे. क़ानून राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल की भी बदली हुई है. तो मोदी सरकार के इस क़दम के पीछे क्या वजहें रहीं और क्या ये फ़ेरबदल सरकार की किसी बड़ी तैयारी का संकेत देते हैं. कर्नाटक का अगला सीएम कौन होगा, चार दिनों की खींचतान के बाद ये सस्पेंस ख़त्म हो गया है. कांग्रेस आलाकमान ने इस पॉलिटिकल डेडलॉक को कैसे सुलझाया? डीके शिवकुमार किन शर्तों पर राज़ी हुए और क्या ये जोड़ी 5 साल तक ऐसी बनी रहेगी. 43 साल पहले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में हुए एक भयावह दंगे की रिपोर्ट योगी सरकार अब सार्वजनिक करना चाह रही है. क्या है इस दंगे की कहानी, अबतक ये रिपोर्ट सामने क्यों नहीं आ पाई थी और अब इसे जाहिर करने के पीछे यूपी सरकार का मक़सद क्या है. हरियाणा का मेवात इलाक़ा साइबर फ्रॉड के लिए कुख्यात हो चला है. इसे दूसरा जामताड़ा क्यों कहा जा रहा है? साइबर क्राइम का ये बड़ा नेटवर्क कौन लोग चला रहे हैं और इसे रोकने के लिए प्रशासन क्या कर रहा है, सुनिए 'दिन भर' में कुलदीप मिश्र से

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किरण रिजिजू का डिमोशन क्यों हुआ

देश से जुड़े बड़े बड़े फैसले अचानक लेकर मोदी सरकार पहले भी चौंकाती रही है. आज इसकी बानगी एक बार फिर देखने को मिली जब किरण रिजिजू को केंद्रीय क़ानून मंत्री के पद से हटा दिया गया. उनकी जगह अर्जुन राम मेघवाल को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है. किरण रिजिजू के साथ उनके डिप्टी एसपी सिंह बघेल का विभाग भी बदल दिया है. अब वे कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री के स्थान पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री होंगे. वहीं किरण रिजिजू को भू विज्ञान मंत्रालय यानी अर्थ साइंस मिनिस्ट्री की ज़िम्मेदारी दी गई है. तो रिजिजू के इस डिमोशन के पीछे क्या पोटेंशियल रीजन्स हो सकते हैं, क़ानून मंत्रालय से उन्हें क्यों हटाया गया? सुनिए '' में

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बिगड़े शिव कुमार कैसे मान गए?

कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया होंगे. दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के बीच मुलाक़ातों का लंबा सिलसिला चला और उसके बाद कल देर रात उनके नाम पर मुहर लग गई. सीएम पद की होड़ में शामिल दूसरे दावेदार डीके शिवकुमार के हिस्से उपमुख्यमंत्री की कुर्सी आई है. इसके अलावा वह कांग्रेस की कर्नाटक यूनिट के अध्यक्ष भी बने रहेंगे. दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति के बाद शपथ ग्रहण की तारीख भी तय हो गई है, 20 मई को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ ही मंत्रियों का एक समूह भी शपथ लेगा. इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कांग्रेस विपक्षी नेताओं को न्यौता भी भेजेगी. लेकिन उससे पहले सबकी दिलचस्पी इस बात को जानने में है कि पार्टी लीडरशिप के सुझाए तमाम फॉर्मूलों को कल तक रिजेक्ट कर रहे डीके आख़िर माने कैसे? सुनिए '' में

 

43 साल पहले के दंगे अब क्यों याद आए?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शहर मुरादाबाद पीतल के कारोबार के लिए मशहूर है. यहां के पीतल के प्रोडक्ट विदेशों में भी एक्सपोर्ट होते हैं. पिछले दिनों ये शहर उस वक्त चर्चा में आया जब उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि 1980 में हुए मुरादाबाद दंगों की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी. इन दंगों में क्या हुआ था, ये समझने के लिए मैंने थोड़ी खोजबीन की तो इंडिया टुडे मैगजीन की नवंबर 1980 में छपी एक रिपोर्ट हाथ लगी. इसमें अधिकारियों के हवाले से लिखा गया था कि दंगों में मारे गए 145 लोगों का पोस्टमार्टम किया गया था. वहीं कई मौतों की रिपोर्ट नहीं हुई. हिंसा का असर इतना गहरा था कि एक महीने से ज्यादा समय तक पूरे जिले में कर्फ्यू लागू रहा, स्कूल-कॉलेज बंद रहे. तो ये पूरा मामला क्या था और इस दंगे की कहानी क्या है? सुनिए '' में

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मेवात साइबर क्राइम का नया 'जामताड़ा'

जामताड़ा, इंडिया के एक पूर्वी राज्य झारखंड का एक ज़िला है. बॉक्साइट की खदानों के लिए मशहूर है. बॉक्साइट एक खनिज है जिससे एल्युमीनियम निकलता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में जामताड़ा को लोग साइबर क्राइम के सबसे बड़े गढ़ के तौर पर जानते हैं. ओटीटी पर एक सीरीज़ भी इस नाम से आ चुकी है. मगर चिंता की बात ये है कि देश के कुछ और इलाक़े जामताड़ा की राह चल पड़े हैं. हरियाणा और राजस्थान के बीच अरावली रेंज में बसा एक इलाक़ा है - मेवात. इसे अगला जामताड़ा कहा जा रहा है, सुनिए '' में

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