उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाया है. ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब बसपा संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटी है. पार्टी के अंदर उनकी भूमिका अब पहले से ज्यादा अहम हो गई है.
आकाश आनंद के बाद ईशान को बड़ी जिम्मेदारी
ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने को बसपा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना जा रहा है. इससे पहले आकाश आनंद के पास पार्टी में अहम जिम्मेदारी थी. अब ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है.
ईशान आनंद लंबे समय से बसपा प्रमुख मायावती के साथ नजर आते रहे हैं. पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में भी उनकी मौजूदगी देखने को मिली है. अब संगठन में उन्हें औपचारिक तौर पर बड़ी भूमिका दी गई है.
राष्ट्रीय संयोजक का पद मिलने के बाद ईशान आनंद की पार्टी में भूमिका काफी अहम हो गई है. उन्हें मायावती के बाद संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की बात कही जा रही है. पार्टी के कामकाज और संगठन से जुड़े मामलों में अब उनकी सक्रियता बढ़ सकती है.
बसपा लंबे समय से अपने संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है. अलग-अलग राज्यों में पार्टी की गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश हो रही है. ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर ईशान आनंद को जिम्मेदारी देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
बसपा प्रमुख मायावती समय-समय पर पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति की समीक्षा करती रही हैं. पार्टी का फोकस जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है. ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उनकी भूमिका राज्यों में संगठन से जुड़े कामों में भी अहम हो सकती है. पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में उनकी भागीदारी बढ़ने की संभावना है.
आकाश आनंद को क्यों दरकिनार किया गया?
ईशान से पहले उनके बड़े भाई आकाश आनंद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक थे. हालांकि 3 सितंबर को मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया था. उन्होंने कहा था कि आकाश को अभी राजनीतिक तौर पर और परिपक्व होने की जरूरत है. इसके बाद 10 सितंबर को मायावती ने उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग कर दिया.
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मायावती ने आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी से ज्यादा परिवार को प्राथमिकता दी. मायावती ने यह भी कहा कि आकाश ने उनके उस सोशल मीडिया पोस्ट को दोबारा साझा नहीं किया, जिसमें अशोक सिद्धार्थ से राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की बात कही गई थी. मायावती ने इसे आकाश के पार्टी के प्रति रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे.
आकाश को पहले मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया था. लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्हें कई बार जिम्मेदारी मिली और फिर वापस ली गई. अब मायावती ने साफ कहा है कि आकाश को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. उनकी जगह छोटे भाई ईशान आनंद को आगे बढ़ाया जा रहा है.