अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने 25 अक्टूबर को होर्मुज जलडमरूमध्य का दौरा किया. यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिकी सेना ने खाड़ी देशों को गर्मियों के बाद से 1.5 अरब बैरल से ज्यादा कच्चे तेल के निर्यात में सहायता करने का महत्वपूर्ण आंकड़ा हासिल किया है. CENTCOM के मुताबिक, पिछले छह महीनों में अमेरिकी बलों की सहायता से 3000 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं.
एडमिरल ब्रैड कूपर ने अमेरिकी सेना के CH-47 चिनूक हेलिकॉप्टर में सवार होकर इस इंटरनेशनल समुद्री मार्ग का हवाई निरीक्षण किया और वहां की मौजूदा परिचालन स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान कूपर ने कहा, 'हम अपने खाड़ी सहयोगियों और शिपिंग उद्योग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. यह दौरा होर्मुज जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है.'
ईरान की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का दावा
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को सफलतापूर्वक हटा दिया है. इसके बाद हाल के महीनों में इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में लगातार सुधार हुआ है.
अपने दौरे के दौरान एडमिरल कूपर ने बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियान में शामिल अमेरिकी सैन्यकर्मियों से भी मुलाकात की. उन्होंने सैनिकों की प्रतिबद्धता और समर्पण के लिए उनका आभार जताया.
कूपर ने कहा, 'आज होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रमुख समुद्री मार्ग हमारे जवानों के असाधारण प्रयासों की बदौलत ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों से मुक्त हैं. हम अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, खाड़ी सहयोग परिषद और शिपिंग उद्योग के साथ मिलकर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं.'
95 फीसदी से ज्यादा जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि हाल के महीनों में ईरान के IRGC की आक्रामक गतिविधियों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 95 प्रतिशत से ज्यादा जहाज सुरक्षित अपने रास्ते से गुजरे हैं.
CENTCOM के मुताबिक, यह स्थिति दर्शाती है कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों का इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बना हुआ है. अमेरिकी सेना ने कहा कि वह खाड़ी देशों और शिपिंग उद्योग के साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए काम करती रहेगी.