साइबर सिटी, मिलेनियम सिटी और देश के प्रमुख कॉरपोरेट हब के रूप में पहचान रखने वाला गुरुग्राम सोमवार को हुई भारी बारिश के बाद एक बार फिर जलभराव और ट्रैफिक जाम से जूझता नजर आया. कुछ घंटों की बारिश में शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए. कहीं स्कूल बसें पानी में फंस गईं तो कहीं माता-पिता अपने बच्चों को कंधों पर उठाकर घुटनों तक भरे पानी से गुजरते दिखाई दिए. राजीव चौक-सोहना रोड पर भीषण जाम लगा और एम्बुलेंस तक जलभराव में फंसी नजर आईं.
जिला प्रशासन के मुताबिक, सोमवार दोपहर 1:30 बजे तक गुरुग्राम में 70 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. बारिश के बाद नरसिंहपुर, हीरो होंडा चौक, राजीव चौक, इफको चौक और पुराने गुरुग्राम के कई हिस्सों में भारी जलभराव हो गया. राजीव चौक के आसपास गाड़ियां पानी में फंसी रहीं. सोहना रोड पर स्कूल बसों और एम्बुलेंस को भी जलभराव से जूझना पड़ा. रेलवे रोड, सेक्टर-5, ओल्ड दिल्ली रोड, महरौली रोड और बसई रोड भी बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए. नाहरपुर अंडरपास में भी पानी भर गया.
बच्चों को कंधे पर लेकर निकले माता-पिता
बारिश के बाद सबसे परेशान करने वाली तस्वीरें स्कूली बच्चों की सामने आईं. कई जगह सड़कों पर इतना पानी भर गया कि स्कूल बसों तक पहुंचना मुश्किल हो गया. माता-पिता बच्चों को कंधों पर बैठाकर पानी से गुजरते नजर आए. सुभाष चौक के आसपास भी स्थिति गंभीर रही. यहां जलभराव के बीच कई स्कूल बसें फंस गईं. पानी में खड़ी बसों के अंदर मौजूद बच्चे बाहर हालात देखते रहे. सड़कों पर पानी का स्तर बढ़ने से वाहनों की रफ्तार थम गई और कई इलाकों में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया.

हरियाणा के दूसरे हिस्सों में भी सोमवार को बारिश हुई. मौसम विभाग के मुताबिक, पलवल में 98 मिमी, फरीदाबाद में 58 मिमी, मेवात में 48.5 मिमी, रेवाड़ी में 11 मिमी और करनाल में 0.5 मिमी बारिश दर्ज की गई. वहीं पड़ोसी पंजाब में सोमवार को बारिश नहीं हुई और कई जगह गर्म एवं उमस भरा मौसम बना रहा.
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25 अगस्त के लिए Work From Home की एडवाइजरी
गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद बने हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने 25 अगस्त के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें जिले के सभी कॉरपोरेट कार्यालयों, सरकारी और निजी स्कूलों तथा शिक्षण संस्थानों को अपने कर्मचारियों और स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम के लिए निर्देशित करने की सलाह दी गई है.
प्रशासन का कहना है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक जाम से राहत मिल सकेगी. साथ ही नागरिक एजेंसियों को सड़कों और नालों की मरम्मत, रखरखाव और जल निकासी से जुड़े काम करने में आसानी होगी. लोगों से भी मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनाने की अपील की गई है.
'हर मानसून यही हाल, आखिर कौन करेगा निवेश?'
गुरुग्राम में जलभराव को लेकर लेखक और स्तंभकार सुहेल सेठ ने भी प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में रहने वाले लोगों की स्थिति बेहद खराब है और हर मानसून में बाढ़ जैसे हालात पैदा होते हैं.
सेठ ने कहा कि हर साल सरकार और नगर निकायों की ओर से समस्या दूर करने के वादे किए जाते हैं, लेकिन हालात नहीं बदलते. उन्होंने सवाल किया कि अगर देश के स्मार्ट शहरों की यह स्थिति है तो कौन भारत में निवेश करना चाहेगा?
सुहेल सेठ ने कहा, 'हर साल जलभराव के बीच करंट लगने से लोगों की मौत होती है और ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो जाता है. मुझे बताइए कि अगर भारत के स्मार्ट शहरों की ऐसी स्थिति है तो कौन भारत में निवेश करना चाहेगा? क्या हमारे पास इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं है? साल-दर-साल यही स्थिति दोहराई जा रही है.'
उन्होंने प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता लगातार इन समस्याओं को उठाती हैं, लेकिन कोई उनकी बात नहीं सुनता. उन्होंने पूछा कि देश के सबसे प्रतिभाशाली इंजीनियरों को ड्रेनेज और सीवेज की समस्या ठीक करने में आखिर इतना समय क्यों लग रहा है?
सेठ ने इसके पीछे तीन प्रमुख समस्याएं गिनाईं. उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डिंग लाइसेंस देने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, मनमाने तरीके से लाइसेंस दिए जा रहे हैं और किसी की जवाबदेही तय नहीं है. उन्होंने कहा, 'यह पूरी तरह शर्मनाक है. हम आखिर किस तरह का ब्रांड इंडिया बना रहे हैं? ऐसा लगता है कि अब लोगों की कोई अहमियत ही नहीं रह गई है. हम रास्ता भटक रहे हैं. हमारे पास हर समाधान के लिए एक समस्या है, जबकि हमें समस्याओं के समाधान तैयार करने चाहिए.'
सुहेल सेठ ने प्रधानमंत्री और सरकार से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि हरियाणा या देश के दूसरे शहरों को चलाने वाले जिम्मेदार लोगों को जगाने की जरूरत है, ताकि हर साल बारिश के दौरान पैदा होने वाली इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके.
करोड़ों के फ्लैट, बाहर पानी में डूबी सड़कें
गुरुग्राम की समस्या इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि यह देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में शामिल है. गोल्फ कोर्स रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास करोड़ों रुपये कीमत वाले अपार्टमेंट और बड़ी कॉरपोरेट इमारतें हैं. इसके बावजूद बारिश के दौरान कई इलाकों में सड़कों का पानी में डूबना लगातार समस्या बना हुआ है.
शहर में हर साल नए एक्सप्रेसवे, हाईराइज बिल्डिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट सामने आते हैं, लेकिन जल निकासी व्यवस्था पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं. बारिश के दौरान सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा दिखाई दिया. कई यूजर्स ने जलभराव के वीडियो और तस्वीरें शेयर करते हुए प्रशासन से जवाब मांगा.

आखिर क्यों बार-बार डूब जाता है गुरुग्राम?
अर्बन प्लानर और आर्किटेक्ट डॉ. सुप्तेंदु पी. बिश्वास ने गुरुग्राम की समस्या के पीछे अनियोजित शहरीकरण को बड़ी वजह बताया था. उनके मुताबिक, गुरुग्राम में पहले विकास हुआ और उसके बाद अर्बन प्लानिंग की गई. हाईराइज इमारतें तो तेजी से बनाई गईं, लेकिन उनसे निकलने वाले सीवेज और बारिश के पानी की निकासी के लिए उसी अनुपात में व्यवस्था विकसित नहीं की गई.
उनका कहना है कि चार-पांच दशक पहले गुरुग्राम में इस तरह जलभराव नहीं होता था. तब प्राकृतिक ड्रेनेज नेटवर्क सक्रिय था. अरावली से आने वाला बारिश का पानी जमीन की प्राकृतिक ढलान के सहारे जोहड़ों, तालाबों और प्राकृतिक नालों से निकल जाता था.
लेकिन तेजी से हुए निर्माण और शहरीकरण के दौरान इन प्राकृतिक जल निकासी मार्गों और जल स्रोतों पर असर पड़ा. यही वजह है कि अब भारी बारिश होते ही शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होने लगता है. सोमवार की बारिश ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि ऊंची इमारतों, एक्सप्रेसवे और बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों वाले गुरुग्राम में बुनियादी ड्रेनेज व्यवस्था कब इस स्तर की होगी कि हर मानसून में शहर की रफ्तार पानी में न थमे.