नए वोटर्स के लिए फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र जमा करने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच अब आयोग से जुड़े सूत्रों ने बड़ा दावा किया है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दोनों चुनाव आयुक्तों ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण, असम में संक्षिप्त पुनरीक्षण समेत देश के 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के विशेष गहन पुनरीक्षण आदेशों के साथ-साथ 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के विशेष गहन पुनरीक्षण आदेशों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी.
सूत्रों ने बताया कि स्वीकृत SIR आदेशों में नए वोटर्स के लिए फॉर्म 6 के साथ जमा किया जाने वाला एक घोषणापत्र शामिल है. यह रिप्रेजेंटेशन ऑफ पब्लिक एक्ट, 1950 की धारा 21(3) के अनुरूप है और इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी बरकरार रखा गया है. यह घोषणापत्र एक अतिरिक्त आवश्यकता है और यह मौजूदा फॉर्म 6 में कोई बदलाव या संशोधन नहीं करता है.
हालांकि, एक अंग्रेजी अखबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में SIR घोषणा को शामिल करने पर असहमति जताई थी. दावा है कि दोनों चुनाव आयुक्तों का तर्क था कि निर्धारित प्रक्रिया के जरिए मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन किए बिना कानूनी रूप से निर्धारित फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता.
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जोशी और संधू ने मई में SIR लागू करने के दौरान फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर असहमति जताई थी. जोशी ने चेतावनी दी थी कि जब तक सरकार 1960 के नियमों में संशोधन नहीं करती, तब तक फॉर्म 6 में बदलाव नहीं किया जा सकता. वहीं, संधू ने इस कदम को अनधिकृत और गैर-कानूनी बताते हुए और इसे 'तुरंत हटाया जाना चाहिए' कहते हुए असहमति का समर्थन किया था.
इस मामले में इंडिया टुडे से बात करते हुए पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने भी सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज की गई असहमतियों का समर्थन किया था. हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है और कहा कि यह अतिरिक्त जरूरत मौजूदा फॉर्म के साथ एक अलग घोषणा पत्र, या 'एनेक्शर D' के जरिए जोड़ी गई थी.
चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत से पहले 24 जून 2025 को जारी अपने निर्देशो का भी हवाला दिया.आयोग के निर्देश में कहा गया था कि नए मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को फॉर्म-6/फॉर्म-8 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी एनेक्सर-डी भी भरना होगा. इस घोषणा पत्र में किए गए दावे के समर्थन के लिए यह फॉर्म जरूरी बताया गया था.
चुनाव आयोग के मुताबिक, फॉर्म-8 उन मतदाताओं को भरना होता है जो एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित होते हैं. इस तरह चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के मुताबिक, फॉर्म-6 अपने मूल स्वरूप में ही है, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत उसके साथ एनेक्सर-डी के तौर पर अतिरिक्त घोषणा पत्र देना जारी है.