दिल्ली में छात्रों के सांसद मार्च के दौरान पुलिस एक्शन पर दिल्ली पुलिस ने खास रिपोर्ट जारी की है. पुलिस ने रिपोर्ट में बताया कि जंतर-मंतर पर हफ्तों तक चले शांतिपूर्ण धरना तब तीखे टकराव में बदल गया, जब प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने हाई-सिक्योरिटी जोन (सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इलाके) की ओर अनधिकृत मार्च करने की कोशिश की. इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस के इस्तेमाल को चरणबद्ध, संयमित और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कार्रवाई बताया है.
पुलिस के अनुसार, संसद का सत्र जारी रहने के दौरान बिना अनुमति हाई-सिक्योरिटी जोन की तरफ मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों और असामाजिक तत्वों ने सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया. बार-बार दी गई चेतावनियों के अनदेखा होने और अधिकारियों पर पथराव के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने निशाना बनाकर लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के सीमित गोले छोड़े.
संसद मार्च की नहीं थी अनुमति
पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर हफ्तों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, लेकिन संसद की तरफ मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी. प्रदर्शनकारियों और उपद्रवी तत्वों ने जंजीरों से बंधे लोहे के बहुस्तरीय बैरिकेड्स तोड़ दिए. इस दौरान कई पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, मीडियाकर्मियों को टारगेट कर छींटाकशी और हूटिंग के साथ बदसलूकी की गई.
रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरक्षा घेरा बनाए रखने की कोशिश कर रहे वरिष्ठ व उम्रदराज पुलिस अधिकारियों को घेर कर उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, जिससे वह घायल हो गए.
इलाके में लागू की गई थी BNS की धारा 163
दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों पर बढ़ती आलोचना का जवाब देते हुए घटनाओं के क्रम को भी समझाया है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि लाठीचार्ज से पहले लाउडस्पीकर के माध्यम से बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 लागू होने की घोषणा की गई थी और भीड़ से तय सीमा के अंदर रहने की अपील की गई थी.
भीड़ ने की बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश
शुरुआत में पुलिस ने अहिंसक अवरोधक के तौर पर कई परतों वाले बैरिकेड के पीछे स्थिर मानव श्रृंखला (ह्यूमन चेन) बनाई. जब भीड़ के सदस्यों ने बैरिकेड पर चढ़ना और उन्हें हटाना शुरू किया तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग (धक्का-मुक्की) की और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन लाठी का इस्तेमाल नहीं किया. इसके बाद भीड़ के द्वारा पथराव और संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के बाद ही बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे हमलावरों पर लक्षित लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस छोड़ने की मंजूरी दी गई.
एक अधिकारी ने कहा, 'बल का इस्तेमाल तभी किया गया, जब बार-बार की गई घोषणाओं और चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और एक के बाद एक कई बैरिकेड तोड़ दिए गए.' उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही भीड़ तितर-बितर होने लगी और सुरक्षा का तत्काल खतरा टल गया, बल का इस्तेमाल तुरंत रोक दिया गया.
रिपोर्ट में पुलिस ने दावा किया है कि घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, लेकिन उन्होंने उकसावे के बावजूद भारी धैर्य दिखाया ताकि स्थिति बेकाबू न हो. भीड़ के तितर-बितर होते ही बल प्रयोग तुरंत रोक दिया गया था. दिल्ली पुलिस ने मामले की औपचारिक समीक्षा और आंतरिक जांच शुरू कर दी है, जिसमें ये देखा जाएगा कि बल प्रयोग कितना सही था और क्या ड्यूटी पर तैनात किसी अधिकारी से कोई चूक हुई है.