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जंतर-मंतर को लेकर कानूनी जंग, प्रोटेस्ट साइट लिस्ट से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो याचिका दायर

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर नए प्रदर्शन स्थल घोषित किए हैं. इस फैसले के खिलाफ दो जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए स्थल शहर से दूर हैं, जिससे नागरिकों को प्रोटेस्ट करने में दिक्कत होगी. अदालत इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई कर सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जंतर-मंतर मामले पर सुनवाई हो सकती है. (Photo- PTI)
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जंतर-मंतर मामले पर सुनवाई हो सकती है. (Photo- PTI)

दिल्ली में जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं. इस मामले को कल तत्काल सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा. इन याचिकाओं पर गुरुवार को ही सुनवाई होने की उम्मीद है. 

दूसरी याचिका लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता नाम के वकील ने दायर की हैं. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के जरिए सरकार तक जनता की आवाज उठाने के लिए एक प्रमुख जगह रहा है.

याचिकाकर्ता के मुताबिक अगर लोगों को शहर से दूर दूसरी जगहों पर प्रदर्शन करने के लिए भेजा जाता है, तो आम लोगों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में लोगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल नाम का रह जाएगा.

पुलिस ने घोषित किए तीन प्रदर्शन स्थल

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी कर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटा दिया था. जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किया गया है. 

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इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने ये कदम उठाया था. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित एक मामले में अर्जी और अलग से PIL दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि नए वैकल्पिक स्थल शहर से बहुत दूर हैं, जिससे नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होता है.

याचिका में की गईं ये मांगे

साथ ही, रामलीला मैदान को पहले ही अदालत ने गलत माना था. सुप्रीम कोर्ट में पहले एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई थी कि जंतर-मंतर की जगह विरोध-प्रदर्शन के लिए कोई वैकल्पिक जगह तय की जाए. इस याचिका में तर्क दिया गया था कि जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों से वहां रहने वाले स्थानीय लोगों, ट्रैफिक और सार्वजनिक सुविधाओं पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार (सॉलिसिटर जनरल) की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि प्रशासन जंतर-मंतर के अलावा कोई वैकल्पिक स्थान तय करने पर विचार कर रहा है. कोर्ट ने 9 अक्टूबर को आदेश देते हुए प्रशासन से नागरिकों में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और आम नागरिकों की सुविधा के बीच संतुलन बनाने को कहा था. इसी आदेश को आधार बनाकर दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन सूची से हटा दिया था.

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यह भी पढ़ें: DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में मांगी माफी, CJP प्रदर्शन के दौरान मेट्रो बंद करने पर दिया जवाब

दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस ने भी जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

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