बिल्किस बानो के दोषियों की सजा पूरी होने से पहले हुई रिहाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने में हुई देरी पर बिल्किस की वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि इसकी वजह रिहाई दस्तावेज की अनुपलब्धता थी. रिहाई होने के बाद जब दोषियों का स्वागत सत्कार हुआ तब पता चला. फिर हमने ऑर्डर को कॉपी के लिए भागदौड़ की.
रेमिशन ऑर्डर मिलने के बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली. ऐसे संगीन अपराध ने तो सजा पूरी होने से पहले रिहाई होनी ही नहीं चाहिए. वैसे भी मेरा मुकदमा महाराष्ट्र में सुना गया. सजा वहीं सुनाई गई तो सजा मे रियायत का अधिकार भी महाराष्ट्र सरकार का ही था. ऐसे गंभीर अपराधियों को ऐसी रियायत देकर सरकार समाज को क्या संदेश देना चाहती है?
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ के समक्ष वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि सरकार को यह ध्यान में रखना चाहिए कि इनको दोषी सिद्ध करते समय निचली अदालत ने और क्या क्या टिप्पणियां, शर्तें और एहतियात बरतने को कहा था. क्योंकि इन दोषियों ने न केवल पांच माह की गर्भवती बिल्किस का रेप किया बल्कि उसकी तीन साल की मासूम बच्ची और परिवार के सात लोगों का कत्ल भी किया था.
ऐसे अमानवीय कुकृत्य के लिए इनको और इन जैसे अपराधियों को सजा में कोई छूट नहीं मिलनी चाहिए चाहे जेल में उनका बरताव कितना भी अच्छा क्यों ना रहा हो. इस बरताव से उनके कुकर्म पर पर्दा नहीं डल सकता. इस मामले पर पीठ गुरुवार को भी सुनवाई जारी रखेगी. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक घंटे में अपनी दलीलें पूरी करने की ताकीद की.