कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ संभावित विलय की अटकलों को खारिज करते हुए ऐसी खबरों को बेबुनियाद अफवाह बताया है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ हाल ही में हुई बैठक में बातचीत सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों तक ही सीमित थी और इसमें दोनों पार्टियों के विलय पर कोई चर्चा नहीं हुई.
उन्होंने कहा, "ये बेबुनियाद अफवाहें हैं. टीएमसी और कांग्रेस नेताओं के बीच बैठक का मकसद सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों को ज्यादा प्रभावी ढंग से उठाने पर चर्चा करना था."
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के सोमवार को नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के बीच संभावित विलय की अटकलें तेज हुईं. इसके बाद, दोनों ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ अलग-अलग बैठकें कीं.
INDIA ब्लॉक के बदला ममता का नजरिया!
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आम तौर पर INDIA ब्लॉक की बैठकों में चुनिंदा मौकों पर ही शामिल होती रही हैं और अक्सर TMC का प्रतिनिधित्व करने के लिए पार्टी के सीनियर नेताओं को भेजती रही हैं. उन्होंने जून 2023 में पटना में हुए विपक्षी गठबंधन के उद्घाटन सत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी में हुई कई बाद की बैठकों में भी हिस्सा नहीं लिया था.
ये अटकलें टीएमसी के विधायी और संसदीय धड़ों के बीच मतभेद के बीच सामने आई हैं. यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बमुश्किल एक महीने बाद हुआ है, जहां 294 सदस्यों वाली विधानसभा में पार्टी को सिर्फ 80 सीटें मिली थीं.
TMC ने विलय की खबरों को नकारा
तृणमूल ने कांग्रेस में विलय की संभावना पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है. ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना जरूरी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना बाकी है कि यह सहयोग गठबंधन का रूप लेगा या विलय होगा.
यहां तक कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 80 में से 64 विधायकों का समर्थन होने का दावा करने वाले रिताब्रता बनर्जी ने भी कांग्रेस के साथ विलय की खबरों को खारिज कर दिया है.
उन्होंने कहा, "विलय के संबंध में, जहां तक हमारी विधायी पार्टी की बात है, हम निश्चित रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं. संसद में मौजूद सांसद भी कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं. कौन किसके साथ विलय कर रहा है?"
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ममता का लंबा कांग्रेस करियर
पश्चिम बंगाल की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने कांग्रेस में दो दशक से ज्यादा वक्त बिताया. साल 1997 में राज्य के नेताओं के साथ मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. उन्हें यह भी लगता था कि कांग्रेस आलाकमान पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज कर रहा है और पार्टी में CPI(M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट की सरकार को प्रभावी ढंग से चुनौती देने का संकल्प नहीं है.
साल 1998 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस बनाई. यह पार्टी राज्य में मुख्य विपक्षी ताकत बनकर उभरी और 2011 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों में लेफ्ट फ्रंट को सत्ता से बाहर कर दिया.
फिलहाल, कांग्रेस और टीएमसी दोनों ने ही विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. हालांकि, टीएमसी अंदरूनी कलह और चुनावी हार से जूझ रही है, इसलिए राजनीतिक जानकार इस बात पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं कि क्या ममता बनर्जी अपनी सियासी किस्मत को फिर से संवारने के लिए कांग्रेस के साथ कोई बड़ा गठबंधन कर सकती हैं.