कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई हिंसा में अपनी पार्टी या समर्थकों की किसी भूमिका से साफ इनकार किया है. आजतक को दिए गए इंटरव्यू में दिपके ने कहा कि यह हिंसा जानबूझकर भाजपा द्वारा आयोजित करवाई गई थी, ताकि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम किया जा सके.
दिपके ने कहा कि हिंसा से एक रात पहले जंतर मंतर के आसपास पत्थरों से भरे ट्रक खड़े किए गए थे. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इसे लेकर सवाल उठाया, तो पुलिस अधिकारियों ने पहले इसे एनडीएमसी का निर्माण कार्य से जुड़ा ट्रक बताया, लेकिन बाद में सामने आया कि वह ट्रक हरियाणा का था और एक सड़क हादसे में पकड़ा गया था.
दिपके ने कहा कि जिन लोगों के हाथों में डंडे और लाठियां देखी गईं, वे न तो पुलिसकर्मी थे और न ही आंदोलन से जुड़े छात्र. उन्होंने सवाल उठाया कि पारदर्शी लाठियां, जो आमतौर पर पुलिस के पास होती हैं, इन लोगों तक कैसे पहुंचीं. उन्होंने कहा कि एक महीने तक शांतिपूर्ण तरीके से चले आंदोलन में अचानक उसी दिन हिंसा होना संयोग नहीं हो सकता.
दिपके ने कहा कि हिंसा के बाद पुलिस ने दिल्ली में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर करीब 2,638 लोगों की पहचान की बात कही थी. उन्होंने सवाल किया कि जब हिस्ट्रीशीटर और पहले से पहचाने गए अपराधी खुलेआम घूम रहे थे, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है. उन्होंने कहा कि पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए इसकी जवाबदेही सरकार की बनती है, न कि प्रदर्शनकारी छात्रों की.
दिपके ने कहा कि उन्होंने आंदोलन की शुरुआत से ही आगाह किया था कि भाजपा से जुड़े कुछ लोग प्रदर्शन को बिगाड़ने के लिए भेजे जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के परिजनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है, जिसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा की बात कही गई है. दिपके ने दोहराया कि इस हिंसा की साजिश आंदोलन को कमजोर करने के मकसद से रची गई थी.