सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर इंडिया ब्लॉक में चर्चा शुरू हो गई है. चुनाव आयोग में सामने आए 'मतभेद' के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सीपीएम और टीएमसी के शीर्ष नेताओं के बीच भी बातचीत हुई है. सूत्रों के मुताबिक, सीपीएम के पत्र पर ममता बनर्जी की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है.
सूत्रों के मुताबिक, सीपीएम महासचिव एमए बेबी और एआईटीसी प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार दोपहर फोन पर बातचीत की. इस दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई. एमए बेबी ने अपने पत्र में इंडिया ब्लॉक प्लस की पार्टियों को एक मंच पर लाने की जरूरत बताई थी, ताकि सीईसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा सके और चुनावी सुधारों को लेकर अभियान शुरू किया जा सके. यह पत्र 23 सितंबर को भेजा गया था, जिसके जवाब में ममता बनर्जी ने अगले दिन दोपहर फोन पर बातचीत की.
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी और सीपीआई-एम दोनों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार और 'देश में किए जा रहे चुनावी फर्जीवाड़े' के खिलाफ बड़े स्तर पर देशव्यापी अभियान शुरू करने की जरूरत पर सहमति जताई है. बंगाल की स्थिति पर भी बातचीत के दौरान चर्चा हुई.
सूत्रों के मुताबिक, एमए बेबी ने 23 सितंबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं को संयुक्त विपक्षी रणनीति को लेकर पत्र भेजा था. यह पत्र दिल्ली में टीएमसी के संसदीय दल के कार्यालय को भी भेजा गया था. इसे ममता बनर्जी के सामने रखा गया, जिसके बाद उन्होंने अगले दिन जवाब देते हुए कहा कि दोनों पार्टियों के नेता बातचीत कर रहे हैं. ममता बनर्जी ने एमए बेबी के संयुक्त कार्रवाई के प्रस्ताव का स्वागत किया और सभी विपक्षी दलों से अपने मतभेद अलग रखते हुए जल्द से जल्द दिल्ली में बैठक करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि 'लोकतंत्र को बचाया' जा सके. उन्होंने हाल में राहुल गांधी के साथ हुई अपनी बातचीत का भी जिक्र किया.
विपक्षी दलों ने एक साथ आने का बनाया मन
सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम के बीच सीपीएम महासचिव ने बीजेपी के अलावा अन्य दलों से बड़े स्तर पर समन्वय की अपील की थी. उन्होंने सभी विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर एक साथ आने और इंडिया ब्लॉक पार्टियों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही थी. सूत्रों के मुताबिक, एमए बेबी और ममता बनर्जी के बीच हुई बातचीत में भी विपक्षी ताकतों को एकजुट करने और संयुक्त आंदोलन की जरूरत पर जोर दिया गया.
इस बड़े स्तर के विचार-विमर्श के तहत आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल, बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक, बीआरएस और डीएमके को भी पत्र भेजे गए हैं. सीईसी और 'चुनावी गड़बड़ियों' के खिलाफ एकजुट होने के लिए विजय की टीवीके को भी पत्र भेजा गया है.
जगन मोहन रेड्डी भी शामिल
जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन की व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए फिर से तीन सदस्यीय समिति की व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए. इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों. जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि इस व्यवस्था को फिर से लागू करने के लिए विधेयक में संशोधन लाया जाना चाहिए. उनकी पार्टी वाईएसआरसीपी मुद्दे के आधार पर बीजेपी को समर्थन देती रही है और अब चुनाव आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद में शामिल हो गई है.
बीजेपी ने साधा निशाना
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी की इंडिया ब्लॉक को लेकर की जा रही पहल पर तंज कसा है. ममता बनर्जी की ओर से सीपीआईएम महासचिव से फोन पर बातचीत कर अगले सप्ताह इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाने की मांग को लेकर दिलीप घोष ने कहा कि अब उन्हें दिल्ली जाना चाहिए, क्योंकि यहां उनके लिए कुछ नहीं बचा है.
उन्होंने कहा कि जब पहले उन्हें बैठक के लिए बुलाया जा रहा था, तब वह नहीं गईं. अब जब वह खुद बैठक के लिए फोन कर रही हैं, तो देखना होगा कि आगे क्या होता है. इसके साथ ही बीजेपी के मंत्री उमेश राय ने भी विपक्षी दलों पर निशाना साधा.
उमेश राय ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब कुछ मिलता है तो सभी एकजुट हो जाते हैं, लेकिन चुनाव आते ही फिर अलग-अलग हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ब्रिगेड परेड ग्राउंड में 40 से अधिक राजनीतिक दल एक जगह इकट्ठा होकर सभा कर रहे थे, लेकिन चुनाव आने पर सभी अलग-अलग हो गए.
उमेश राय ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर विपक्षी दलों से सड़क पर उतरने के बजाय कोर्ट जाने को कहा. उन्होंने कहा कि अगर उनके पास आरोपों के सबूत हैं तो उन्हें कोर्ट जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग कई बार देशद्रोहियों को बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाते रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग के खिलाफ लड़ाई के लिए सड़क पर उतर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह समाज के लिए अच्छा नहीं होगा.