बिहार सरकार ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कथित अपराधों की जांच लिए अब CBI को राज्य सरकार से पहले से मंजूरी लेनी होगी.
तीन सितंबर को जारी अधिसूचना में यह बात की गई है. इस अधिसूचना में कहा गया है कि यह नया आदेश इस मामले पर पहले जारी किए गए सभी अधिसूचनाओं की जगह लेगा.
हालांकि शनिवार को पुलिस मुख्यालय की ओर से बयान जारी करते हुए सफाई दी गई कि मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. साथ ही, उन मीडिया रिपोर्ट्स को भी बेबुनियाद और गलत बताया गया है जिनमें दावा किया गया था कि बिहार की बीजेपी सरकार ने विरोधी रुख अपनाया है.
विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था, 'बिहार के राज्यपाल इसके जरिए दिल्ली पुलिस स्पेशल एस्टेब्लिशमेंट के सदस्यों की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को पूरे राज्य में बढ़ाने की मंज़ूरी देते हैं, ताकि उन अपराधों की जांच की जा सके जो भारत सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के कर्मचारियों और भारत सरकार के सीधे नियंत्रण वाले निजी व्यक्तियों द्वारा किए गए हों."
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बता दें, CBI एक गैर सांविधिक संस्था है, जिसे दिल्ली पुलिस स्पेशल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 1946 से शक्तियां मिलती हैं. इस अधिसूचना में कहा गया है कि उन मामलों में पहले से बिहार सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा जिनमें अपराध सरकारी कर्मचारियों, या बिहार सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाली किसी कॉर्पोरेशन, कंपनी या बैंक से जुड़े लोगों या बिहार सरकार से आर्थिक मदद पाने वाले या पहले से मदद पा चुके संस्थानों से जुड़े हो.
पुलिस मुख्यालय की ओर से बयान भी आया है कि समय-समय पर ऐसे नियमों के जरिए CBI की जांच शक्तियों को विनियमित किया जाता रहा है. बयान में कहा गया है कि इसका मकसद कोई नया प्रावधान लाना नहीं, बल्कि मौजूदा प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करना है.