असम के धेमाजी जिले के एक बड़े अफसर को भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उसने लोगों को नौकरी और ठेके दिलाने का झांसा देने के लिए एक मिमिक्री करने वाले शख्स की मदद ली, जो फोन पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और असम के मुख्य सचिव रवि कोटा जैसे बड़े अफसरों की आवाज में बात करता था. यानी सामने वाले को लगता था कि खुद मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव उससे बात कर रहे हैं, जबकि हकीकत में वह सिर्फ एक नकल उतारने वाला इंसान होता था.
गिरफ्तार अफसर का नाम देबेश्वर बोरा है. वह धेमाजी जिले के डेवलपमेंट कमिश्नर हैं और 1999 बैच के असम सिविल सर्विस अफसर हैं. उन्हें मुख्यमंत्री की स्पेशल विजिलेंस सेल ने गिरफ्तार किया. उन पर सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करने और अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा करने का आरोप है.
गिरफ्तारी से पहले विजिलेंस टीम ने धेमाजी और गुवाहाटी में उनके घरों पर तलाशी ली थी और उनसे पूछताछ भी की गई थी. यह पूरा मामला एक डॉक्टर की शिकायत के बाद शुरू हुआ, जिसमें बताया गया था कि जब बोरा मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट में जॉइंट सेक्रेटरी थे, तब वहां कई गड़बड़ियां हुई थीं. बोरा जून 2022 से जुलाई 2025 तक इस पद पर रहे, उसके बाद ही उन्हें धेमाजी का डेवलपमेंट कमिश्नर बनाया गया.
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अब जांच में एक नया पहलू सामने आया है. बोरा पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी और ठेके दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे लिए, और भरोसा जिताने के लिए एक बिचौलिये की मदद ली जो अलग अलग आवाजें निकालने में माहिर था. यह शख्स फोन पर मुख्यमंत्री और दूसरे बड़े अफसरों की आवाज में बात करता था, जिससे लोगों को यकीन हो जाता था कि बोरा की पहुंच सरकार के सबसे ऊपरी स्तर तक है.
यह पूरा खेल तब उजागर हुआ जब बोरा का सामना धेमाजी के एक नेता और कारोबारी से हुआ. जांच अधिकारी अब गुवाहाटी और लखीमपुर में बोरा और उनके परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी जांच कर रहे हैं.
गौरतलब है कि नवंबर 2020 में, जब बोरा कोकराझार में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर थे, तब एक 32 साल की महिला ने उन पर बलात्कार की कोशिश और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. उस समय बोरा ने महिला के खिलाफ काउंटर एफआईआर भी दर्ज कराई थी. हालांकि यह मामला मौजूदा जांच से अलग है.