हरियाणा के अंबाला में बोरवेल में गिरने से मासूम की मौत की घटना ने झकझोर दिया है. चार वर्षीय मासूम निरवैर सिंह मंगलवार को खेत में खेल रहा था और इस दौरान ही वह बोरवेल में गिर गया था. करीब 21 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे बुधवार तड़के जब बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने खेत के मालिक और जमीन पट्टे पर लेने वाले दो लोगों के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है.
बुधवार सुबह निकाला जा सका बच्चा
निरवैर को बुधवार सुबह करीब 3:40 बजे बोरवेल से बाहर निकाला गया और तुरंत अंबाला कैंट के सिविल अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. ऋषिपाल सिंह ने बताया कि बच्चे को बाहर निकालते ही मौके पर उसकी प्रारंभिक जांच की गई थी, लेकिन उसमें जीवन के कोई संकेत नहीं मिले. इसके बाद उसे अस्पताल लाया गया, जहां जरूरी जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
बच्चे के शरीर में कई जगहों पर लगी चोट
पोस्टमार्टम पैनल के सदस्य डॉ. सुमित कुकरेजा ने बताया कि बच्चे के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं. उसकी छाती, सिर और दोनों घुटनों पर गंभीर खरोंच और चोटें थीं. इसके अलावा उसके फेफड़ों में कीचड़ मिला पानी भी पाया गया. डॉक्टरों के अनुसार डूबने और गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई.

मंगलवार सुबह 6:30 बजे हुए हादसा
यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे अंबाला जिले के धनेओरा गांव में हुआ. निरवैर अपने पिता मनजीत सिंह के साथ खेत पर गया था, जहां उसके दादा करनैल सिंह काम कर रहे थे. मनजीत अपने पिता के लिए खाना लेकर पहुंचे थे. खेत पहुंचने के बाद मनजीत काम में लग गए, जबकि निरवैर अपने दादा के पास बैठा था. कुछ देर बाद वह खेलते-खेलते खेत में बने खुले बोरवेल के पास पहुंच गया.
बताया गया कि बच्चा बोरवेल में मिट्टी डाल रहा था. बोरवेल के आसपास की जमीन बारिश और नमी के कारण गीली थी. जब वह अंदर झांकने के लिए आगे झुका तो मिट्टी धंस गई और वह सीधे 220 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया. मनजीत सिंह ने बताया कि अचानक तेज आवाज सुनाई दी. वे और परिवार के अन्य सदस्य दौड़कर मौके पर पहुंचे और बच्चे को आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. परिवार और गांव के लोगों ने पहले अपने स्तर पर बच्चे को निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर सुबह करीब 7:30 बजे प्रशासन को सूचना दी गई.
बारिश बनी रेस्क्यू ऑपरेशन मे बाधा
सूचना मिलते ही उपायुक्त अजय सिंह तोमर, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सेना और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया. कई घंटों तक लगातार खुदाई और तकनीकी उपकरणों की मदद से बच्चे तक पहुंचने की कोशिश की गई. उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने बताया कि सूचना मिलते ही सभी एजेंसियों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया था. प्रशासन ने बच्चे को जीवित निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कई बार बाधा आई और अभियान प्रभावित हुआ.
अंबाला के पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि बच्चे के परिवार की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (लापरवाही से मौत) के तहत खेत मालिक हरनेक सिंह और खेत पट्टे पर लेने वाले दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. परिजनों का आरोप है कि बोरवेल से मोटर निकालने के बाद उसे खुला छोड़ दिया गया था. न तो उसके ऊपर ढक्कन लगाया गया और न ही आसपास कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया. इसी गंभीर लापरवाही के कारण निरवैर की जान चली गई.
बुधवार को गांव में पूरे गमगीन माहौल में निरवैर का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. गांव के सरपंच कप्तान सिंह ने बताया कि मनजीत सिंह बिजली विभाग में कार्यरत हैं. परिवार में उनकी पत्नी जसबीर कौर हैं और निरवैर से बड़ी एक बेटी है.

स्कूल जाने के लिए एक दिन पहले ही नानी के घर से लौटा था मासूम
परिजनों ने बताया कि निरवैर इस साल पास के भनोखेड़ी गांव के एक स्कूल में नर्सरी कक्षा में दाखिल हुआ था. गर्मी की छुट्टियों में वह अपनी नानी के घर गया हुआ था और सोमवार को ही वापस लौटा था क्योंकि 1 जुलाई से स्कूल खुलने वाले थे. हादसे की सूचना मिलने पर हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज भी मंगलवार शाम मौके पर पहुंचे. उन्होंने बचाव अभियान की समीक्षा की और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की.
इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित विभाग को जिले के सभी खेतों में बने बोरवेल की जांच करने के निर्देश दिए हैं ताकि कहीं भी कोई बोरवेल खुला न रह जाए. उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने किसानों से अपील की कि उपयोग में न आने वाले बोरवेल को तुरंत बंद करें या सुरक्षित ढंग से ढक दें. उन्होंने कहा कि यदि इस बोरवेल को समय रहते बंद कर दिया गया होता तो शायद एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी.
गौरतलब है कि पिछले महीने पंजाब के होशियारपुर में भी चार साल का एक बच्चा नए खुदे बोरवेल में गिर गया था. हालांकि करीब नौ घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था. वहीं वर्ष 2006 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पांच वर्षीय प्रिंस के बोरवेल में गिरने की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था. तब 48 घंटे चले अभियान के बाद उसे जीवित बचा लिया गया था.