नीट-यूजी और पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से जंतर-मंतर पर लंबे समय से आंदोलन चल रहा था.प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे थे.एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई.इसके बाद देश के दूसरे हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और विपक्षी दलों के कई नेता खुलकर आंदोलन के समर्थन में आ गए.
लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई.इसके बाद शनिवार (25 जुलाई) को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और सीजेपी ने अपना 36 दिनों से जारी आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी.आंदोलन खत्म होने के बाद रविवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में शिवसेना उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से 'तिरंगा विजय रैली' आयोजित की गई. बड़ी संख्या में युवा हाथों में तिरंगा और संविधान से जुड़े पोस्टर लेकर रैली में पहुंचे. सुबह से हल्की बारिश के बावजूद शिवाजी पार्क में युवाओं की भीड़ जुटी रही.
रैली के दौरान एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने नीट विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले 21 छात्रों की याद में एक मिनट का मौन रखवाया.उन्होंने कहा कि देशभर में शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन सफल हुआ है और इसने दिखाया है कि देश की जेन-जी सरकार को चुनौती दे सकती है.राज ठाकरे ने कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस का धन्यवाद किया.उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच का फर्क भी देख लिया है.
'देशभक्तों ने अंधभक्तों को हराया'
रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि'आज कोई चुनाव नहीं जीता गया है. देशभक्तों ने अंधभक्तों को हराया है. यह एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत है. यह बीजेपी बनाम इंडिया की लड़ाई है.' उद्धव ने कहा कि जाति और धर्म को पीछे छोड़कर लोग 'मैं भारतीय हूं' की भावना के साथ एकजुट हुए हैं.
उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं ने अपनी एकजुटता से भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 'सुनहरा अध्याय' लिखा है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, 'लोग पूछते हैं कि जब चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं तो हम चुनाव की बात क्यों कर रहे हैं. इसका जवाब सीधा है. प्रधानमंत्री मोदी को अब समझ आ गया है कि वोट चुराए जा सकते हैं, लेकिन लोगों को नहीं.'
धर्मेंद्र प्रधान को पहले क्यों नहीं हटाया?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय मंत्रिमंडल से पहले क्यों नहीं हटाया गया? उद्धव ने कहा कि 'मैं प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहता हूं कि अपने पसंदीदा धर्मेंद्र को कैबिनेट से हटाने में आपको कितना दर्द हुआ? क्या वह दर्द उन परिवारों के दर्द से बड़ा था, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया? मैं उस दर्द को न भूल सकता हूं और न कभी भूलूंगा.'
उन्होंने युवाओं से आंदोलन के दौरान पैदा हुई इस जागरूकता को खत्म नहीं होने देने की अपील की. उद्धव ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों के अहंकार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए. युवाओं ने लोगों की ताकत दिखा दी है और अब इसे कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए.
केंद्र के दूसरे मंत्रियों पर भी निशाना
उद्धव ठाकरे ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री गिरते रुपये और बढ़ती महंगाई पर बात नहीं करतीं, लेकिन पेपर लीक के 'फायदे' समझाती हैं. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करने का आरोप लगाया.केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर तंज कसते हुए उन्होंने E20 पेट्रोल का मुद्दा उठाया और संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इसे लेकर भी सवाल उठाए जाएंगे. रैली में मौजूद कई छात्रों ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया. एक छात्र ने कहा कि सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं है और देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है.
शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे ने भी युवाओं की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई ने हाथों में तिरंगा लेकर एक आवाज में अपना संदेश दिया है.उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछना देशविरोधी होना नहीं है. वहीं, एनसीपी (SP) विधायक रोहित पवार ने कहा कि सत्ता और अहंकार को आखिरकार 'जनशक्ति' के सामने झुकना पड़ता है. रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि पूरे देश में शुरू हुआ आंदोलन सफल रहा है और लोगों का यहां जुटना उसी उत्साह का जश्न है. उन्होंने कहा, 'इस आंदोलन ने दिखा दिया कि देश की जेन-जी सरकार से किस तरह जवाब मांग सकती है.'