महाराष्ट्र के ठाणे जिले में गुटखे की अवैध बिक्री और जुए के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हरीश गजवानी की हत्या के मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस ने हत्या के 12 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
शुरुआती जांच में हत्या के पीछे पुरानी दुश्मनी की बात सामने आई है. गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश नायडू भी शामिल है. विट्ठलवाड़ी पुलिस ने IPC की धारा 103 और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
अज्ञात हमलावरों ने बुधवार रात करीब 8.30 बजे उल्हासनगर रेलवे स्टेशन परिसर के पास हरीश गजवानी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. उनके सिर में दो गोलियां लगी थीं. पुलिस को शक है कि पुरानी दुश्मनी के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया.
हत्या के बाद घटनास्थल के पास का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसमें कथित तौर पर एक संदिग्ध धारदार हथियार लेकर जाता दिखाई दे रहा है. पुलिस के मुताबिक, वारदात का तरीका पिछले महीने स्थानीय शिवसेना यूबीटी नेता प्रदीप पूर्णेकर की हत्या से मिलता-जुलता है. उस मामले में भी हमलावरों ने कथित तौर पर पास से हमला किया था और बाद में धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया था.
यह भी पढ़ें: 'पंजाब बंद' का दिखा मिला-जुला असर, परमिंदर झोटा की हत्या के बाद पिता ने दी थी कॉल
27 सितंबर की पोस्ट में बताया था जान का खतरा
50 साल के सामाजिक कार्यकर्ता हरीश गजवानी ने 27 सितंबर को एक्स पर एक पोस्ट में अपनी जान को खतरा होने का दावा किया था. उन्होंने कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि वे गुटखा कारोबार और रमी क्लब जैसी अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं. गजवानी ने इस पोस्ट में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त तुकाराम मुंढे को भी टैग किया था.
पुलिस उपायुक्त सचिन गोरे ने बताया कि शुरुआती जांच में गजवानी और गिरफ्तार आरोपी अविनाश नायडू के बीच पुरानी दुश्मनी का पता चला है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, गजवानी 2021 के एक हत्या मामले में आरोपी था. उसने कथित तौर पर नायडू पर हमला कर उसकी हत्या करने की कोशिश की थी. समय के साथ दोनों के बीच विवाद कम हो गया था, लेकिन बादल में नायडू ने रंजिश के तहत गजवानी की हत्या की साजिश रची.
पुलिस के मुताबिक, गजवानी का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था और वह उल्हासनगर में चल रही अवैध गतिविधियों के मुद्दे लगातार उठाता था. इससे इन गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल लोग उससे नाराज थे. फिलहाल पुलिस हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है.