मुंबई में ऐतिहासिक खिलाफत हाउस की जमीन और इसके पुनर्विकास को लेकर विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. इसी कड़ी में AIMIM नेता वारिस पठान ने इस परियोजना का विरोध करते हुए खिलाफत हाउस पर ताला जड़ दिया.
दरअसल खिलाफत हाउस की जमीन पर एक प्रस्तावित 120 बेड के आधुनिक अस्पताल के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. वारिस पठान ने मीडिया के सामने दावा किया कि इस ऐतिहासिक इमारत को गिराकर चुपचाप पुनर्विकास का काम शुरू कर दिया गया है.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि खिलाफत कमेटी ने इस पूरी प्रक्रिया में महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड से किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली है, जो पूरी तरह गलत है.
'कोर्ट जो फैसला देगी हम वो मानेंगे'
वारिस पठान ने कहा, 'मुंबई में खिलाफत हाउस 1911 से है. हमें पता चला है कि खिलाफत हाउस को तोड़ दिया है. वहां पुनर्विकास का काम शुरू हो गया है. खिलाफत कमेटी का कहना है कि ये वक्फ की जगह नहीं है लेकिन वक्फ का कहना है कि ये हमारी जगह है. हमने इसका समाधान निकाला है कि कोर्ट जो फैसला देगी हम वो मानेंगे.'
दूसरी तरफ, ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी (AIKC) के चेयरमैन सरफराज आरजू ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि उनकी संस्था साल 1954 में चैरिटी कमिश्नर के तहत एक पब्लिक ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर्ड हुई थी, जबकि खिलाफत कमेटी का गठन साल 1919 में हुआ था.
उनके मुताबिक, ये जमीन जिला कलेक्टर के अधीन है, इसलिए इस संस्था को किसी भी सूरत में वक्फ ट्रस्ट के दायरे में नहीं रखा जा सकता.
बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने ऑडिटेड खाते समय पर जमा न करने के मामलों को लेकर खिलाफत कमेटी को एक नोटिस जारी किया था. इसे कमेटी ने ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि वो चैरिटी कमिश्नर के अंतर्गत आने वाला एक पब्लिक ट्रस्ट हैं.
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बीजेपी ने उठाए वारिस पठान के रवैये पर सवाल
वारिस पठान के खिलाफत हाउस के दरवाजे पर ताला लगाने और विरोध प्रदर्शन करने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. BJP अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता वसीम खान ने वारिस पठान के इस आचरण पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि इससे इलाके की शांति व्यवस्था खतरा में आ सकती है.