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कृषि यंत्रों पर 50% तक सब्सिडी! बेलर, मल्चर, रोटोकल्टीवेटर सब पर छूट, यहां करें आवेदन

खेती के लिए नया कृषि यंत्र खरीदने की सोच रहे किसानों के लिए काम की खबर है. श्रेडर, मल्चर, बेलर, स्लेशर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हे रेक, स्ट्रॉ रेक और रोटोकल्टीवेटर जैसे यंत्रों पर सब्सिडी पाने का मौका है. पात्र किसानों को अधिकतम 50% तक अनुदान मिल सकता है.

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मध्य प्रदेश सरकार कृषि उपकरणों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है. (AI Image)
मध्य प्रदेश सरकार कृषि उपकरणों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है. (AI Image)

अगर आप खेती के लिए नया कृषि यंत्र खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. मध्य प्रदेश में किसानों को श्रेडर, मल्चर, बेलर, स्लेशर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), हे रेक, स्ट्रॉ रेक और रोटोकल्टीवेटर जैसे कृषि यंत्रों पर सब्सिडी पाने का मौका मिल रहा है.

पात्र किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) से जुड़े यंत्रों पर लागत की अधिकतम 50% तक सब्सिडी मिल सकती है. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर 2026 है, जबकि पात्र किसानों का चयन 7 अक्टूबर को लॉटरी से किया जाएगा.

ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी

इस चरण में ऐसे कृषि यंत्रों को शामिल किया गया है, जिनका इस्तेमाल फसल कटने के बाद खेत में बचे अवशेषों को हटाने और अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने में किया जाता है. इनमें श्रेडर और मल्चर, बेलर, स्लेशर, एसएमएस, हे रेक और स्ट्रॉ रेक तथा रोटोकल्टीवेटर शामिल हैं.

यानी अगर किसान खेती के लिए इन यंत्रों को खरीदना चाहता है, तो पात्रता के अनुसार सरकार से मिलने वाली सब्सिडी से उसकी अपनी जेब से लगने वाली रकम कम हो सकती है. हालांकि, वास्तविक सब्सिडी यंत्र की कीमत, मॉडल, किसान की श्रेणी और जमीन की जोत के आधार पर अलग-अलग होगी.

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50% तक सब्सिडी, लेकिन हिसाब ऐसे समझें

फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े कृषि यंत्रों पर पात्र किसानों को कुल लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसान को हर यंत्र पर सीधे आधी कीमत वापस मिल जाएगी. सब्सिडी की गणना सरकार की तय मॉडल कीमत और किसान की पात्रता के आधार पर होगी. किसान आवेदन करने से पहले ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर उपलब्ध सब्सिडी कैलकुलेटर से संभावित ग्रांट की जानकारी भी देख सकते हैं.

आवेदन के साथ डीडी जरूरी

इस योजना में आवेदन करते समय एक अहम बात का ध्यान रखना होगा. किसान को अपने जिले के सहायक कृषि यंत्री के नाम निर्धारित धरोहर राशि का बैंक ड्राफ्ट यानी डीडी बनवाना होगा. इसकी स्कैन कॉपी ऑनलाइन आवेदन के साथ अपलोड करना जरूरी है. बिना डीडी की स्कैन कॉपी के आवेदन मान्य नहीं माना जाएगा.

अलग-अलग कृषि यंत्रों के लिए धरोहर राशि इस तरह है:

बेलर: ₹15,000

श्रेडर और मल्चर: ₹5,500

हे रेक और स्ट्रॉ रेक: ₹5,000

एसएमएस: ₹3,500

रोटोकल्टीवेटर: ₹2,500

स्लेशर: ₹2,000

आवेदन से पहले ये कागज रखें तैयार

किसान को आवेदन के लिए एग्री-स्टैक फार्मर आईडी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक के पहले पन्ने की कॉपी, जमीन की बी-1 की प्रति और निर्धारित डीडी की स्कैन कॉपी तैयार रखनी होगी. एससी और एसटी वर्ग के किसानों को जाति प्रमाण पत्र भी देना होगा. अगर कृषि यंत्र ट्रैक्टर से चलने वाला है, तो ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन कार्ड भी जरूरी होगा.

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जिन किसानों का पहले से पंजीकरण है, वे आधार नंबर और आधार ओटीपी के जरिए लॉगिन करके आवेदन कर सकते हैं. वहीं नए किसानों को पहले नजदीकी एमपी ऑनलाइन या सीएससी सेंटर पर जाकर बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसके बाद किसान अपनी जरूरत का कृषि यंत्र चुनकर दस्तावेज और डीडी की स्कैन कॉपी अपलोड कर आवेदन जमा कर सकता है.

6 अक्टूबर आवेदन की आखिरी तारीख

ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 6 अक्टूबर 2026 तक चलेगी. आवेदन मिलने के बाद पात्र किसानों का चयन लॉटरी के जरिए किया जाएगा और 7 अक्टूबर 2026 को लॉटरी निकाली जाएगी. इसलिए अगर आप इन कृषि यंत्रों में से कोई खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय दस्तावेज और डीडी पहले से तैयार रखना बेहतर होगा. सब्सिडी, पात्रता और आवेदन से जुड़ी स्थानीय जानकारी के लिए किसान अपने ब्लॉक, जिला कृषि कार्यालय या सहायक कृषि यंत्री कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं.

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