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'पेड़ कब गिरेगा, कौन जानता है?', चेंबूर बस हादसे पर मंत्री शिरसाट का विवादित बयान, विरोध के बाद दी सफाई

मुंबई के चेंबूर में स्कूल की बस पर पेड़ गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई. इस मामले पर महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि पेड़ गिरना प्राकृतिक घटना है और इसे रोकना किसी के हाथ में नहीं है. उनके इस बयान को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद शिरसाट को सफाई पेश करनी पड़ी.

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संजय शिरसाट ने कहा कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया. (Photo- FB)
संजय शिरसाट ने कहा कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया. (Photo- FB)

मुंबई के चेंबूर में यूनिवर्सल हाई स्कूल के 13 छात्रों को घर ले जा रही एक स्कूल बस पर अचानक पीपल का एक बड़ा पेड़ गिर गया था. इस हादसे में एक बच्चे की मौत हो गई थी और 5 बच्चे घायल भी हो गए थे. अब इस हादसे पर महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट का बयान सामने आया है, जिसे लेकर विरोध शुरू हो गया है.

मंगलवार को हादसे पर बात करते हुए शिरसाट ने कहा था, 'किसी को कैसे पता चलेगा कि पेड़ गिरने वाला है? पेड़ का गिरना या बिजली कड़कना हमारे हाथ में नहीं है. शायद तेज हवाएं चल रही थीं.'

शिरसाट के इस बयान पर विपक्ष ने आपत्ति जताई , जिसके बाद मंत्री ने सफाई दी और दावा किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है.

विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

संजय शिरसाट के इस बयान पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरत पवार) ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि ये टिप्पणी सरकार के 'अहंकार के स्तर' को दिखाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि मानसून की तैयारियां सिर्फ कागजों पर थीं, जमीन पर कुछ नहीं था.

वहीं, एनसीपी (एसपी) नेता कलाईड क्रैस्टो ने मंत्री के बयान को 'शर्मनाक' और 'असंवेदनशील' करार दिया. उन्होंने कहा कि एक बच्चे की मौत को प्राकृतिक घटना कहकर टाला नहीं जा सकता. मानसून से पहले पेड़ों का सही तरीके से ऑडिट और रखरखाव किया जाना चाहिए था.

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विवादित बयान पर लिया यू-टर्न

विवाद बढ़ता देखकर मंत्री शिरसाट ने सफाई देते हुए कहा, 'ये एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी. मैंने कहा था कि भले ही पेड़ों का गिरना प्राकृतिक है, लेकिन नगर निगम अधिकारियों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए. जो पेड़ गिरने वाले हैं, उन्हें मानसून शुरू होने से पहले हटा दिया जाना चाहिए. पेड़ों की छंटाई समय रहते की जानी चाहिए थी. पर्यावरण बचाने के नाम पर ऐसी चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, वरना ऐसे हादसे दोबारा होंगे.'

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विधानसभा में उठा मुद्दा

बुधवार को ये मामला महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठा. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने इस त्रासदी के लिए मुंबई नगर निगम (BMC) को जिम्मेदार ठहराया. चेंबूर से शिवसेना विधायक तुकाराम काते ने दावा कि वो लगातार अधिकारियों से एहतियाती कदम उठाने की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई.

विधायक मुर्जी पटेल ने पीड़ित परिवार की मदद की मांग की. उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मृतक बच्चे के परिवार को 2.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दे रहे हैं. उन्होंने अंधेरी के मरोल इलाके में भी पेड़ गिरने की घटना का जिक्र करते हुए तुरंत ट्री-सर्वे कराने की मांग की.

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