मुंबई में हाल ही में चुने गए कई कॉरपोरेटरों के चुनावी हलफनामे और उनके द्वारा दी गई जानकारी को चुनौती दी जा रही है. 2026 के BMC चुनावों के बाद विजयी उम्मीदवारों के खिलाफ कुल 79 चुनाव याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इनमें जाति प्रमाणपत्र, हलफनामे, आपराधिक मामलों की जानकारी और संपत्ति की घोषणा में कथित गड़बड़ियों समेत कई आधार शामिल हैं.
RTI एक्टिविस्ट अनिल गलगली से मिली जानकारी के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के कॉरपोरेटरों के खिलाफ सबसे ज्यादा 24 याचिकाएं हैं. इसके बाद BJP के खिलाफ 16 और कांग्रेस के खिलाफ 10 याचिकाएं हैं. शिवसेना (शिंदे) के कॉरपोरेटरों के खिलाफ सात, AIMIM के खिलाफ पांच, MNS के खिलाफ दो और NCP के खिलाफ एक याचिका है.
सोमवार को पूर्व कॉरपोरेटर और पूर्व मेयर विशाखा राउत को जाति प्रमाणपत्र अमान्य होने के चलते अयोग्य घोषित किया गया. इससे यह सामने आया कि चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद भी चुनावी जीत न्यायिक जांच के अधीन रह सकती है.
पांच पर गिरी गाज
79 याचिकाएं लंबित या दाखिल होने के बीच अब तक पांच कॉरपोरेटरों के चुनाव रद्द किए जा चुके हैं. बाकी मामलों के नतीजों का BMC में राजनीतिक दलों की संरचना और संख्याबल पर असर पड़ सकता है. उम्मीदवारों को चुनाव से पहले नामांकन दाखिल करते समय हलफनामे जमा करने होते हैं, जिनमें व्यक्तिगत, जाति प्रमाणपत्र, वित्तीय और कानूनी जानकारी शामिल होती है. जानकारी में कथित गड़बड़ी या गलत जानकारी चुनाव को चुनौती देने और उसके बाद न्यायिक कार्यवाही का आधार बन सकती है.
अब तक जिन कॉरपोरेटरों का चुनाव अयोग्य घोषित किया जा चुका है, उनमें विशाखा राउत (शिवसेना UBT), दीपक सावंत (शिवसेना UBT), रोशन शेख (AIMIM), समीर पटेल (AIMIM) और बुशरा मलिक (NCP) शामिल हैं.