महाराष्ट्र में भाषा को लेकर शुरू हुई मुहिम अब सड़क पर उतर आई है. राज्य के अलग-अलग RTO कार्यालयों ने गुरुवार से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की मराठी की व्यावहारिक समझ जांचनी शुरू कर दी. मुंबई के दादर ईस्ट में भी RTO अधिकारियों ने चालकों से सीधे बातचीत कर उनकी मराठी परखी. जांच में जिन ड्राइवर्स को पर्याप्त जानकारी नहीं मिली, उन्हें एक महीने के भीतर मराठी सीखने का नोटिस दिया गया.
दादर ईस्ट में जांच के दौरान टैक्सी चालक इजहार मोहम्मद को भी एक महीने का नोटिस मिला. उन्होंने कहा कि उन्हें बुनियादी मराठी आती है और वह भाषा को और बेहतर सीखेंगे.
इजहार ने बताया कि मराठी सीखने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है. वहीं एक दूसरे चालक ने कहा कि उन्हें रोजमर्रा की बोलचाल की मराठी आती है, लेकिन किसी को कोई भाषा बोलने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
कैसे की जा रही जांच?
RTO अधिकारी चालकों से किसी किताब की परीक्षा नहीं ले रहे, बल्कि रोजमर्रा की बातचीत के आधार पर उनकी भाषा की समझ जांच रहे हैं. अधिकारियों के पास 15 सवालों वाला एक पेपर है, जिसमें यात्री और ड्राइवर के बीच सफर के दौरान होने वाली सामान्य बातचीत से जुड़े सवाल शामिल हैं. इस परीक्षण में किसी खास जगह जाना है या नहीं, वहां पहुंचने में कितना समय लगेगा जैसे सवाल पूछे जाते हैं, जिनका मराठी में जवाब देना होगा.
RTO इंस्पेक्टर एस. सुत्रावे के मुताबिक, यात्री सेवा देने वाले वाहन चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक समझ जरूरी है.

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अब हर चालक की सीधे बातचीत के जरिए भाषा की क्षमता जांची जाएगी और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगी. जो चालक मराठी सीखने से इनकार करते हैं या तय समय सीमा के बाद भी जरूरी लेवल हासिल नहीं करते, उनके बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है. लगातार इनकार करने पर बैज और परमिट को स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है.
एक महीने पहले से शुरू हुई थी तैयारी
बता दें, यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई. महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने की मुहिम पहले ही शुरू की जा चुकी थी. 18 अगस्त को ठाणे में आयोजित कार्यक्रम में बताया गया कि करीब 1.25 लाख चालकों ने मराठी का प्रशिक्षण पूरा कर सर्टिफिकेट हासिल किया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, 105 दिनों के अभियान के दौरान करीब 1.65 लाख चालकों को मराठी ट्रेनिंग और प्रमाण पत्र दिए जा चुके हैं.
इस अभियान के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि मराठी मजबूरी की नहीं, बल्कि लगाव और श्रद्धा की भाषा है. अब प्रशिक्षण के बाद RTO की जांच शुरू होने से सरकार ने इस नीति को अमल में लाने की दिशा में अगला कदम बढ़ा दिया है.