महाराष्ट्र सरकार दिवाली से पहले 4.15 लाख किसानों को कर्जमाफी का लाभ देने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, सहकारिता विभाग ने इसके लिए वित्त विभाग से 4,000 करोड़ रुपये की मंजूरी मांगी है. इसके साथ ही सरकार ने दिवाली से पहले महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के कर्मचारियों की सैलरी के लिए 391 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने कर्मचारियों के वेतन के लिए यह राशि जारी करने की मंजूरी दी है.
कर्जमाफी योजना के तहत 25 लाख किसानों की पहचान की गई है. इनमें से अब तक 15,85,493 किसानों को इसका लाभ मिल चुका है. सरकार इस योजना के तहत अब तक 13,275 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर चुकी है.मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिला है. यहां 6.27 लाख किसानों को सहायता दी गई है. जिन किसानों ने अपनी केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन अभी तक उन्हें कर्जमाफी का लाभ नहीं मिला है, उन्हें दिवाली से पहले राहत मिलने की उम्मीद है. वहीं, करीब 4.82 लाख किसानों की केवाईसी प्रक्रिया अभी बाकी है.
इससे पहले, महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर के करीब 1.5 करोड़ सूखा प्रभावित किसानों को दिवाली पर बड़ी राहत देने का फैसला किया है. सरकार इन किसानों को 5,000 रुपये की अग्रिम आर्थिक सहायता देगी.राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यह राशि इसी सप्ताह सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कराई जाए. यानी किसानों के खातों में यह रकम दिवाली से पहले पहुंच जाएगी.
किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी है. खेती और कर्ज के संकट से जूझ रहे किसानों की मौत के आंकड़ों ने सरकारी मदद और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच राज्य में 13,928 किसानों ने आत्महत्या की. यानी इस दौरान हर दिन औसतन 8 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान गंवाई.
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इन आंकड़ों को लेकर जानकारी मांगे जाने पर राज्य सरकार के राहत एवं पुनर्वास विभाग ने जिलावार और महीने के हिसाब से आंकड़े देने से इनकार कर दिया. यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन के कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे ने यह जानकारी मांगी थी. पहली अपील के बाद उन्हें पूरे राज्य में किसानों की आत्महत्या का कुल आंकड़ा दिया गया, लेकिन यह जानकारी नहीं दी गई कि सबसे ज्यादा मौतें किन जिलों में हुईं.
8,145 परिवार सरकारी मदद के पात्र
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, किसानों की आत्महत्या के 13,928 मामलों में से 8,145 परिवारों को सरकारी सहायता के लिए पात्र पाया गया. वहीं, 4,042 मामलों में परिवारों को मदद के लिए अपात्र घोषित किया गया, जबकि 941 मामले अभी जांच के अधीन हैं. पात्र परिवारों में भी सभी को सरकारी सहायता नहीं मिल पाई है. कुल 8,145 पात्र परिवारों में से 7,850 परिवारों को एक लाख रुपये की मदद दी गई है. वहीं, 295 पात्र परिवार अब भी सहायता का इंतजार कर रहे हैं.