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अब 60 नहीं 70... बदली बुढ़ापे की परिभाषा! सिंगापुर के इस बड़े फैसले ने क्यों छेड़ी 'एजिंग' पर बहस?

बढ़ती उम्र और रिटायरमेंट को लेकर दुनिया भर की सोच तेजी से बदल रही है. इस देश ने तय शेड्यूल से एक साल पहले ही यानी 2029 से अपनी रिटायरमेंट और री-एम्प्लॉयमेंट की उम्र बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है. बेहतर हेल्थकेयर और बदलती लाइफस्टाइल के बीच अब 'बुढ़ापे' की परिभाषा भी बदल रही है. अब 60 साल की उम्र अब थके हुए बुढ़ापे की नहीं बल्कि एक्टिव करियर की मानी जा रही है.

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सिंगापुर ने तय समय से पहले बढ़ाई रिटायरमेंट एज, क्या बदल रही है ग्लोबल एजिंग की परिभाषा?
सिंगापुर ने तय समय से पहले बढ़ाई रिटायरमेंट एज, क्या बदल रही है ग्लोबल एजिंग की परिभाषा?

क्या आपको याद है वो दौर जब 55 या 60 साल की उम्र आते ही लोगों को 'बुजुर्ग' मान लिया जाता था? तब यह माना जाता था कि अब इंसान की जिंदगी का एक्टिव दौर खत्म हो चुका है और उसे घर बैठकर आराम करना चाहिए. लेकिन वक्त तेजी से बदल रहा है, और इसके साथ ही बदल रही है इंसानी जिंदगी, सेहत और 'एजिंग' की पूरी परिभाषा!

आज के दौर में 60 साल की उम्र में भी लोग मैराथन दौड़ रहे हैं, नई कंपनियां खड़ी कर रहे हैं और फुल-रिदम में कॉर्पोरेट ऑफिस संभाल रहे हैं. इस बदलते ट्रेंड की एक बड़ी बानगी देखने को मिली है सिंगापुर में, जहां सरकार ने अपनी वर्कफोर्स को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है.

सिंगापुर का बड़ा फैसला: समय से पहले बढ़ रही रिटायरमेंट एज

ब्लूमबर्ग टैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर ने 'ट्रिपार्टाइट वर्कग्रुप ऑन सीनियर एम्प्लॉयमेंट' की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है. इसके तहत देश में तय शेड्यूल (जो 2030 था) से पहले ही, यानी 1 जनवरी 2029 से रिटायरमेंट और री-एम्प्लॉयमेंट की उम्र बढ़ाई जा रही है.

नए बदलाव में क्या होगा 

रिटायरमेंट की उम्र मौजूदा 64 साल से बढ़ाकर 65 साल कर दी जाएगी.
कर्मचारियों को री-एम्प्लॉयमेंट (यानी काम जारी रखने) की उम्र 70 साल तक मिलेगी.

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इसके अलावा, जो सीनियर नागरिक तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी काम करते रहेंगे, सरकार उनके टैक्स बोझ को कम करेगी ताकि उनकी टेक-होम सैलरी (हाथ में आने वाली कमाई) बढ़ सके. साथ ही, जो कर्मचारी री-एम्प्लॉयमेंट से छूट जाते हैं, उन्हें वित्तीय सुरक्षा देने के लिए 'एंप्लॉयमेंट असिस्टेंस पेमेंट' की मिनिमम और मैक्सिमम सीमा भी बढ़ाई जा रही है.

अब क्यों बदल रही है बुढ़ापे की परिभाषा?

सिंगापुर का यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक नियम नहीं है, बल्कि यह इस बात का बड़ा सबूत है कि इंसानों की उम्र बढ़ने का पैमाना पूरी तरह बदल चुका है.

कुछ दशकों पहले तक मेडिकल फैसिलिटीज सीमित थीं, लाइफस्टाइल कठिन थी और औसत उम्र (Life Expectancy) भी कम हुआ करती थी. तब 60 साल का होना मतलब बुढ़ापे की दहलीज पर खड़ा होना था. लेकिन आज एडवांस्ड हेल्थकेयर, फिटनेस अवेयरनेस और बेहतर खान-पान की वजह से इंसान 60 की उम्र में भी शारीरिक और मानसिक रूप से उतना ही एनर्जेटिक महसूस करता है जितना वो 40 की उम्र में था.

आज 'बुढ़ापा' अब किसी तय उम्र का मोहताज नहीं रहा. जो लोग अपनी सेहत का ख्याल रखते हैं और लगातार खुद को अपडेट रखते हैं, उनके लिए उम्र केवल एक नंबर बनकर रह गई है.

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एक्टिव एजिंग है आज की मांग

ग्लोबल लेवल पर यह ट्रेंड तेजी से उभर रहा है जिसे 'एक्टिव एजिंग' कहा जाता है. लोग अब रिटायरमेंट के बाद सिर्फ घर बैठने के बजाय समाज और इकॉनमी में अपना योगदान जारी रखना चाहते हैं. सिंगापुर का यह फैसला इस बात की मिसाल है कि सरकारें भी अब यह समझ रही हैं कि उनकी सीनियर आबादी अब बोझ नहीं, बल्कि एक मजबूत और अनुभवी एसेट है.

यही नहीं, एआई के दौर में एक नया ट्रेंड भी सामने आया जिसमें दुनिया की कई नामी कंपनियां र‍िटायरमेंट के बाद अपने कर्मचारियों को जॉब के ऑफर दे रही हैं. उन्हें आर्ट‍िफ‍िश‍ियल इंटेल‍िजेंस के साथ साथ अनुभवी और ट‍िकाऊ कर्मचार‍ियों की भी जरूरत है. तो ऐसे में अगर आप भी यह सोचते थे कि 60 साल के बाद जिंदगी की रफ्तार धीमी हो जाती है, तो अपना नजरिया बदल लीजिए क्योंकि जमाना बदल रहा है और उम्र के मायने भी. 

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